पीएम-ईबस सेवा योजना (PM-eBus Sewa): शहरों में 10,000 इलेक्ट्रिक बसें

✓ जानकारी जांची गई: 15 अक्टूबर 2026

सीधा जवाब

पीएम-ईबस सेवा आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की योजना है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2023 में मंज़ूरी दी। इसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) से उन शहरों में 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य है, जहां सिटी बस सेवा कम है या नहीं है। यह शहरों/राज्यों के लिए योजना है; आम नागरिक इसमें कोई आवेदन नहीं करते, उन्हें फायदा बस सेवा के रूप में मिलता है।

मंत्रालय
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय
लक्ष्य
10,000 ई-बसें (PPP मॉडल)
अनुमानित खर्च
₹57,613 करोड़, जिसमें केंद्र ₹20,000 करोड़
शहर
बस सेवा के लिए 169, ग्रीन मोबिलिटी के लिए 181

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योजना के दो हिस्से

हिस्साक्या होता है
A: सिटी बस सेवा का विस्तार (169 शहर)ई-बसें PPP पर चलती हैं; केंद्र 10 साल तक बस चलाने में मदद देता है। साथ में डिपो और बिजली (चार्जिंग) का ढांचा।
B: ग्रीन अर्बन मोबिलिटी (181 शहर)बस प्राथमिकता, ऑटोमेटेड किराया वसूली, मल्टीमॉडल इंटरचेंज, चार्जिंग ढांचे जैसे काम।

कौन से शहर शामिल हो सकते हैं

  • 2011 की जनगणना के अनुसार 3 लाख या ज़्यादा आबादी वाले शहर।
  • सभी केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी और पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों की राजधानी।
  • जिन शहरों में संगठित बस सेवा नहीं है, उन्हें प्राथमिकता।

शहर का चुनाव राज्य सरकार के प्रस्ताव और केंद्र की मंज़ूरी से होता है। आपके शहर में ई-बस कब आएगी, यह अपने नगर निगम या राज्य परिवहन/शहरी विकास विभाग से पूछें।

आम लोगों के लिए इसका मतलब

  • कोई व्यक्तिगत आवेदन नहीं: इस योजना में किसी व्यक्ति को पैसा, बस परमिट या नौकरी का फॉर्म नहीं मिलता।
  • किराया: ई-बस का किराया शहर की बस सेवा (नगर निगम/परिवहन निगम) तय करती है।
  • शिकायत: बस, रूट या समय की शिकायत अपने शहर की बस सेवा के हेल्पलाइन या नगर निगम में करें।

"PM ई-बस सेवा में ड्राइवर/कंडक्टर भर्ती" जैसे मैसेज में फीस मांगी जाए तो सावधान रहें। बसें चलाने वाले ऑपरेटर अपनी भर्ती खुद करते हैं; भर्ती की जानकारी शहर की बस सेवा या ऑपरेटर की आधिकारिक सूचना से ही लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीएम-ईबस सेवा योजना क्या है?

आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की योजना, जिसमें PPP मॉडल पर शहरों में 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने और हरित परिवहन ढांचा बनाने का लक्ष्य है।

क्या आम लोग इस योजना में आवेदन कर सकते हैं?

नहीं। यह शहरों और राज्यों के लिए योजना है। लोगों को इसका फायदा शहर में बस सेवा के रूप में मिलता है।

योजना पर कितना खर्च होगा?

अनुमानित खर्च ₹57,613 करोड़ है, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹20,000 करोड़ है। बाकी राज्य/शहर देते हैं।

कौन से शहर शामिल हैं?

2011 की जनगणना के अनुसार 3 लाख+ आबादी वाले शहर, केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियां और पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों की राजधानियां। अंतिम सूची राज्यों के प्रस्ताव से बनती है।

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