रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा): पूरी गाइड
सीधा जवाब
रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार के बीच लिखित करार है जिसमें किराया, अवधि, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और शर्तें लिखी जाती हैं। रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 17(1)(d) के अनुसार एक साल से ज़्यादा अवधि (या साल-दर-साल) वाली लीज़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, जबकि एक साल तक की लीज़ का रजिस्ट्रेशन धारा 18(c) के तहत वैकल्पिक है; इसी वजह से ज़्यादातर एग्रीमेंट 11 महीने के बनते हैं। हर एग्रीमेंट पर राज्य के कानून के हिसाब से स्टाम्प ड्यूटी लगती है। कुछ राज्यों में नियम अलग हैं, जैसे महाराष्ट्र में Leave and License एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन अवधि चाहे जो हो।
- रजिस्ट्रेशन ज़रूरी
- 1 साल से ज़्यादा / साल-दर-साल लीज़ (धारा 17(1)(d))
- 1 साल तक
- रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक (धारा 18(c)), स्टाम्प ड्यूटी फिर भी
- स्टाम्प ड्यूटी
- राज्य का स्टाम्प कानून तय करता है
- Aadhaar e-Sign
- IT Act धारा 3A और दूसरी अनुसूची के तहत मान्य
यह पेज आम जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन के नियम राज्य सरकारें बदलती रहती हैं; एग्रीमेंट साइन करने से पहले अपने राज्य के official पोर्टल या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से ताज़ा दर और प्रक्रिया पक्की करें, और ज़रूरत हो तो वकील से सलाह लें।
रेंट एग्रीमेंट की सभी गाइड
रेंट एग्रीमेंट क्या है और क्यों ज़रूरी है
कानून की भाषा में घर किराए पर देना "लीज़" (पट्टा) है। रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 2(7) के अनुसार "lease" में agreement to lease भी शामिल है, यानी किराए का लिखित करार भी उसी नियम में आता है। लिखित एग्रीमेंट के फायदे:
- विवाद में सबूत: किराया, डिपॉज़िट, नोटिस पीरियड और मरम्मत की ज़िम्मेदारी लिखी हो तो झगड़ा कम होता है।
- पते का प्रमाण: किरायेदार को कई कामों में मौजूदा पते का सबूत चाहिए होता है; किराए का लिखित एग्रीमेंट इसमें काम आ सकता है (कौन-सा दस्तावेज़ मान्य है, यह हर संस्था अपनी सूची से तय करती है)।
- मकान मालिक की सुरक्षा: अवधि खत्म होने पर मकान खाली करने और बकाया की शर्त लिखी रहती है।
- पुलिस वेरिफिकेशन: कई राज्यों में मकान मालिक से किरायेदार की जानकारी पुलिस को देने की अपेक्षा है; एग्रीमेंट की कॉपी इसमें काम आती है। देखें किरायेदार पुलिस वेरिफिकेशन।
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11 महीने का एग्रीमेंट क्यों बनता है
रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 17(1)(d) में लिखा है कि "leases of immovable property from year to year, or for any term exceeding one year, or reserving a yearly rent" का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। धारा 18(c) के अनुसार "leases of immovable property for any term not exceeding one year" का रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक है।
| एग्रीमेंट की अवधि | रजिस्ट्रेशन (केंद्रीय कानून) | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| 11 महीने / 1 साल तक | वैकल्पिक (धारा 18(c)) | स्टाम्प ड्यूटी फिर भी देनी है; महाराष्ट्र जैसे राज्यों का अपना नियम अलग हो सकता है |
| 1 साल से ज़्यादा | अनिवार्य (धारा 17(1)(d)) | सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन; फीस राज्य तय करता है |
| "साल-दर-साल" या सालाना किराया तय करने वाली लीज़ | अनिवार्य (धारा 17(1)(d)) | अवधि कम लिखी हो तब भी यह शर्त लागू हो सकती है |
न कराने का असर: धारा 49 के अनुसार जिस दस्तावेज़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, वह बिना रजिस्ट्रेशन के संपत्ति पर असर नहीं डालता और उस लेन-देन के सबूत के तौर पर नहीं लिया जाता (कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर)। धारा 23 के अनुसार दस्तावेज़ साइन होने के चार महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन के लिए पेश करना होता है।
इसलिए ज़्यादातर लोग 11 महीने का एग्रीमेंट बनाते हैं और हर 11 महीने पर नया एग्रीमेंट (renewal) करते हैं। यह कानूनन ठीक है, पर हर नए एग्रीमेंट पर स्टाम्प ड्यूटी फिर लगती है।
एग्रीमेंट में क्या-क्या लिखें
पूरा क्लॉज़-दर-क्लॉज़ फॉर्मेट और उसका मतलब रेंट एग्रीमेंट फॉर्मेट पेज पर है। कम से कम ये बातें साफ लिखी हों:
- दोनों पक्षों के पूरे नाम, पिता/पति का नाम, पता और पहचान पत्र का प्रकार
- किराए पर दी गई जगह का पूरा पता, फ्लोर, कमरे, पार्किंग और फर्नीचर/फिटिंग की सूची
- मासिक किराया, भुगतान की तारीख और तरीका, किराया बढ़ने की शर्त
- सिक्योरिटी डिपॉज़िट की राशि और लौटाने की शर्त
- शुरू होने की तारीख, अवधि (जैसे 11 महीने) और नोटिस पीरियड
- बिजली, पानी, मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स किसके ज़िम्मे
- इस्तेमाल का मकसद (रहने के लिए/व्यावसायिक), सब-लेटिंग की मनाही
- दोनों के हस्ताक्षर, तारीख और दो गवाह
स्टाम्प ड्यूटी: कितनी और क्यों
स्टाम्प ड्यूटी दस्तावेज़ पर लगने वाला राज्य का टैक्स है। रेंट/लीज़ एग्रीमेंट पर दर हर राज्य के स्टाम्प कानून की अनुसूची में लिखी होती है और आम तौर पर अवधि, किराया, डिपॉज़िट/प्रीमियम पर निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के FAQ के अनुसार, भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा 35 के तहत उचित स्टाम्प के बिना किरायानामा न्यायालय में सबूत के रूप में मान्य नहीं होता।
| राज्य | रेंट/लीज़ पर स्टाम्प ड्यूटी का आधार | गाइड |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | Leave and License (60 महीने तक): कुल किराया + नॉन-रिफंडेबल राशि + डिपॉज़िट पर 10% ब्याज का 0.25% (आर्टिकल 36A) | पूरी जानकारी |
| गुजरात | 1 साल से कम: रिहायशी ₹500, कमर्शियल ₹1,000 (गुजरात स्टाम्प (संशोधन) अधिनियम 2025) | पूरी जानकारी |
| उत्तर प्रदेश | 12 माह तक के किरायानामे पर ड्यूटी विभाग का पोर्टल किराया, अवधि और प्रीमियम से खुद गिनता है | पूरी जानकारी |
इंटरनेट पर घूम रही "₹100 के स्टाम्प पेपर पर रेंट एग्रीमेंट" वाली बात हर राज्य पर लागू नहीं होती। कई राज्यों में ड्यूटी किराए के प्रतिशत में या तय राशि में है। हमेशा अपने राज्य की official अनुसूची या विभाग का कैलकुलेटर देखें।
e-Stamp और स्टाम्प पेपर में फर्क
| e-Stamp | पुराना (physical) स्टाम्प पेपर | |
|---|---|---|
| क्या है | ऑनलाइन/अधिकृत केंद्र से जारी स्टाम्प सर्टिफिकेट, जिसमें यूनिक नंबर होता है | छपा हुआ non-judicial स्टाम्प पेपर, वेंडर से |
| जांच | सर्टिफिकेट नंबर से जारी करने वाले पोर्टल पर verify होता है | नकली पेपर पहचानना मुश्किल |
| राशि | जितनी ड्यूटी बने, ठीक उतनी | तय मूल्यवर्ग (denomination) के पेपर जोड़ने पड़ते हैं |
| राज्य के नियम | कई राज्यों में e-Stamp ही मुख्य तरीका है | कुछ राज्यों ने बड़े मूल्यवर्ग के physical पेपर बंद किए हैं; जैसे UP में 11 मार्च 2025 की अधिसूचना के अनुसार ₹10,000 से ₹25,000 मूल्यवर्ग के physical पेपर अब मान्य नहीं (पहले खरीदे गए ऐसे पेपर 31.03.2025 तक चले) |
e-Stamp किस पोर्टल या संस्था से मिलेगा, यह राज्य तय करता है। अपने राज्य के पेज पर official तरीका देखें।
नोटरी बनाम रजिस्ट्रेशन
| नोटरी कराया हुआ एग्रीमेंट | रजिस्टर्ड एग्रीमेंट | |
|---|---|---|
| कहां | नोटरी पब्लिक के पास | सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (या राज्य की ऑनलाइन व्यवस्था) |
| कानूनी हैसियत | हस्ताक्षर की पुष्टि होती है; यह रजिस्ट्रेशन नहीं है | रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज |
| कब काफी | 1 साल तक की लीज़, जहां राज्य का कानून अलग से रजिस्ट्रेशन न मांगे | 1 साल से ज़्यादा की लीज़ में ज़रूरी; महाराष्ट्र में Leave and License में हमेशा |
| स्टाम्प ड्यूटी | देनी होती है | देनी होती है, साथ में रजिस्ट्रेशन फीस |
2 या 3 साल का एग्रीमेंट सिर्फ नोटरी कराने से रजिस्ट्रेशन की शर्त पूरी नहीं होती। धारा 17(1)(d) वाले दस्तावेज़ का रजिस्ट्रेशन ही होना चाहिए।
क्या Aadhaar e-Sign से साइन किया एग्रीमेंट मान्य है?
IT Act 2000 की धारा 3A के अनुसार कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर तकनीक से प्रमाणित कर सकता है जो भरोसेमंद हो और दूसरी अनुसूची (Second Schedule) में दी गई हो। दूसरी अनुसूची में "Aadhaar या अन्य e-KYC सेवा से e-authentication" वाली तकनीक शामिल है (S.O. 1119(E), 1 मार्च 2019 से "or other" जोड़ा गया)। Controller of Certifying Authorities (CCA) के eSign FAQ के अनुसार eSign से किए हस्ताक्षर कानूनी रूप से मान्य हैं, बशर्ते वे दूसरी अनुसूची और Controller की गाइडलाइन के तहत हों।
- किन दस्तावेज़ों पर IT Act लागू नहीं (पहली अनुसूची): negotiable instrument (चेक और कुछ विनियमित संस्थाओं वाले मामलों को छोड़कर), power of attorney (कुछ विनियमित संस्थाओं वाले मामलों को छोड़कर), trust, और will (वसीयत)।
- अचल संपत्ति की बिक्री का करार: पहले पहली अनुसूची में "contract for sale or conveyance of immovable property" शामिल था। MeitY की अधिसूचना S.O. 4720(E), 26 सितंबर 2022 से यह प्रविष्टि हटा दी गई। ध्यान दें: India Code पर छपी संकलित कॉपी में यह प्रविष्टि अभी भी दिखती है, पर official राजपत्र अधिसूचना के अनुसार यह हट चुकी है।
- रेंट/लीज़ एग्रीमेंट पहली अनुसूची की किसी प्रविष्टि में नहीं आता।
- रजिस्ट्रेशन अलग विषय है: e-Sign से साइन हो जाने से रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत खत्म नहीं होती। जिन एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, उनकी प्रक्रिया राज्य का पंजीकरण विभाग तय करता है।
उदाहरण: उत्तर प्रदेश स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग 12 माह तक के किरायानामे की डिजिटल स्टाम्पिंग अपने पोर्टल पर Aadhaar e-KYC और Aadhaar e-Sign से कराता है। देखें UP किरायानामा गाइड।
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 4 अक्टूबर 2026
- रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 (India Code)धारा 17, 18, 23, 49
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (India Code)धारा 3A, पहली और दूसरी अनुसूची
- CCA: IT Act अनुसूची संशोधन अधिसूचनाएंS.O. 4720(E), S.O. 1119(E)
- CCA: eSign सेवाeSign FAQ
- UP स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग: किरायानामा FAQigrsup.gov.in/igrsup/homePage/kirayanama_faq.html
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का ही क्यों बनाते हैं?
रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 की धारा 17(1)(d) के अनुसार एक साल से ज़्यादा अवधि वाली लीज़ का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जबकि धारा 18(c) के तहत एक साल तक की लीज़ का रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक है। 11 महीने का एग्रीमेंट बनाने से सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाने और रजिस्ट्रेशन फीस से बचा जाता है। स्टाम्प ड्यूटी फिर भी देनी होती है, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का अपना नियम अलग है।
क्या बिना रजिस्ट्रेशन वाला रेंट एग्रीमेंट मान्य है?
एक साल तक की लीज़ का रजिस्ट्रेशन केंद्रीय कानून में वैकल्पिक है, इसलिए सही स्टाम्प वाला 11 महीने का एग्रीमेंट मान्य दस्तावेज़ है। एक साल से ज़्यादा की लीज़ बिना रजिस्ट्रेशन के धारा 49 के अनुसार संपत्ति पर असर नहीं डालती और सबूत के तौर पर सीमित रूप से ही ली जाती है।
क्या ₹100 के स्टाम्प पेपर पर रेंट एग्रीमेंट चल जाएगा?
हर राज्य में नहीं। स्टाम्प ड्यूटी राज्य का कानून तय करता है और कई राज्यों में यह किराए, अवधि और डिपॉज़िट पर निर्भर है। उचित स्टाम्प के बिना किरायानामा अदालत में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता (भारतीय स्टाम्प अधिनियम धारा 35, जैसा UP स्टाम्प विभाग का FAQ बताता है)। अपने राज्य की दर देखें।
क्या नोटरी कराना ज़रूरी है?
केंद्रीय कानून में नोटरी कराना अनिवार्य नहीं है। नोटरी से हस्ताक्षर की पुष्टि होती है, पर यह रजिस्ट्रेशन का विकल्प नहीं है। एक साल से ज़्यादा की लीज़ और महाराष्ट्र के Leave and License एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
क्या Aadhaar e-Sign वाला रेंट एग्रीमेंट कानूनी है?
IT Act 2000 की धारा 3A और दूसरी अनुसूची के तहत Aadhaar (या अन्य e-KYC) आधारित e-Sign मान्य इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर है। रेंट/लीज़ एग्रीमेंट पहली अनुसूची (जिन दस्तावेज़ों पर IT Act लागू नहीं) में नहीं है। सही स्टाम्प ड्यूटी देना और जहां ज़रूरी हो वहां राज्य की प्रक्रिया से रजिस्ट्रेशन कराना अलग से ज़रूरी है।
स्टाम्प ड्यूटी कौन देता है, मकान मालिक या किरायेदार?
यह राज्य के कानून और आपसी सहमति पर निर्भर है। उदाहरण के लिए UP स्टाम्प विभाग की शुल्क सूची में लीज़ की ड्यूटी lessee (किरायेदार) के ज़िम्मे दिखाई गई है, जबकि महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट की धारा 55 रजिस्ट्रेशन कराने की ज़िम्मेदारी मकान मालिक पर डालती है। एग्रीमेंट में साफ लिख दें कि स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन का खर्च कौन उठाएगा।
रेंट एग्रीमेंट रिन्यू कैसे करें?
अवधि खत्म होने से पहले नया एग्रीमेंट बनाएं जिसमें नई अवधि और नया किराया लिखा हो। नए एग्रीमेंट पर फिर से स्टाम्प ड्यूटी लगती है। अगर नई अवधि एक साल से ज़्यादा है तो रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा।
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