रेंट एग्रीमेंट फॉर्मेट: क्लॉज़-दर-क्लॉज़ चेकलिस्ट और आम गलतियां
सीधा जवाब
एक अच्छा रेंट एग्रीमेंट छोटा हो सकता है, पर उसमें पार्टियों की पहचान, जगह का पूरा विवरण, किराया और भुगतान की तारीख, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और उसकी वापसी, अवधि और नोटिस पीरियड, मरम्मत और बिलों की ज़िम्मेदारी, और दोनों के हस्ताक्षर व दो गवाह ज़रूर होने चाहिए। नीचे 14 क्लॉज़ का सैंपल ढांचा है जिसमें हर क्लॉज़ का मतलब और उसमें होने वाली गलती बताई गई है। यह सैंपल है, कानूनी ड्राफ्ट नहीं; स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन अपने राज्य के नियम से तय करें।
- आम अवधि
- 11 महीने (1 साल तक रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक, धारा 18(c))
- किस पर छापें
- राज्य के नियम के अनुसार सही राशि का e-Stamp / स्टाम्प पेपर
- हस्ताक्षर
- मकान मालिक, किरायेदार और 2 गवाह
- कॉपी
- दोनों पक्षों के पास एक-एक
यह पेज आम जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन के नियम राज्य सरकारें बदलती रहती हैं; एग्रीमेंट साइन करने से पहले अपने राज्य के official पोर्टल या सब-रजिस्ट्रार ऑफिस से ताज़ा दर और प्रक्रिया पक्की करें, और ज़रूरत हो तो वकील से सलाह लें।
एग्रीमेंट लिखने से पहले ये 5 बातें तय करें
- अवधि: 11 महीने रखेंगे या लंबी अवधि? एक साल से ज़्यादा होने पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है (रजिस्ट्रेशन एक्ट धारा 17(1)(d))। महाराष्ट्र में Leave and License हर अवधि में रजिस्टर होता है।
- किराया और बढ़ोतरी: मासिक किराया कितना, किस तारीख तक, और रिन्यूअल पर कितने प्रतिशत बढ़ेगा।
- डिपॉज़िट: कितना और कब लौटेगा। कुछ राज्यों में कानूनी सीमा है, जैसे तमिलनाडु के 2017 के कानून में।
- कौन-सी चीज़ें साथ दी जा रही हैं: फर्नीचर, AC, गीज़र, पंखे, चाबियां; इनकी सूची बाद में विवाद बचाती है।
- खर्च कौन देगा: स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, बिजली-पानी, सोसाइटी मेंटेनेंस।
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सैंपल फॉर्मेट: 14 क्लॉज़ और उनका मतलब
नीचे की टेबल में दूसरी कॉलम में सैंपल भाषा है (हमारी आसान भाषा, कोई official ड्राफ्ट नहीं) और तीसरी में उसका मतलब/सावधानी।
| क्लॉज़ | सैंपल भाषा (सार) | मतलब और सावधानी |
|---|---|---|
| 1. शीर्षक और तारीख | "यह किरायानामा आज दिनांक ___ को ___ (शहर) में निष्पादित किया गया।" | जिस दिन साइन हो वही तारीख। रजिस्ट्रेशन करना हो तो धारा 23 के अनुसार साइन होने के 4 महीने के अंदर पेश करें। |
| 2. मकान मालिक (पहला पक्ष) | नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, स्थायी पता | जो व्यक्ति मालिक है वही साइन करे। संयुक्त मालिक हों तो सबका नाम या अधिकार पत्र। |
| 3. किरायेदार (दूसरा पक्ष) | नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, स्थायी पता, पहचान पत्र का प्रकार | पूरा आधार नंबर लिखने की ज़रूरत नहीं; पहचान पत्र का प्रकार और आखिरी अंक काफी हो सकते हैं। |
| 4. संपत्ति का विवरण | मकान/फ्लैट नंबर, मंज़िल, कमरे, पार्किंग, पूरा पता | "शेड्यूल" के रूप में अलग पैरा में लिखें; अस्पष्ट पता बाद में परेशानी देता है। |
| 5. अवधि | "___ से ___ तक, कुल 11 महीने" | शुरू और खत्म दोनों तारीख लिखें। "साल-दर-साल" जैसे शब्द रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बना सकते हैं (धारा 17(1)(d))। |
| 6. किराया | "₹___ प्रति माह, हर महीने की ___ तारीख तक, बैंक ट्रांसफर/UPI से" | राशि अंकों और शब्दों दोनों में। नकद के बजाय बैंक/UPI से भुगतान रिकॉर्ड रखता है। |
| 7. सिक्योरिटी डिपॉज़िट | "₹___ ब्याज-रहित डिपॉज़िट, मकान खाली करने पर बकाया घटाकर ___ दिन में वापस" | कटौती किन बातों पर होगी (बकाया किराया/बिल, नुकसान) यह लिखें; सामान्य टूट-फूट पर कटौती न रखें। |
| 8. बिल और मेंटेनेंस | बिजली, पानी, गैस, सोसाइटी चार्ज किसके ज़िम्मे | मीटर रीडिंग शुरू के दिन लिखें। प्रॉपर्टी टैक्स आम तौर पर मालिक देता है; जो तय हो वही लिखें। |
| 9. मरम्मत | छोटी मरम्मत किरायेदार, बड़ी (ढांचा, पाइपलाइन, वायरिंग) मालिक | "छोटी" का मतलब राशि से तय कर सकते हैं (जैसे ₹___ तक)। |
| 10. इस्तेमाल | "केवल रहने के लिए"; बिना अनुमति सब-लेटिंग या बदलाव नहीं | दुकान/ऑफिस के लिए अलग शर्तें और कई राज्यों में अलग स्टाम्प दर। |
| 11. लॉक-इन और नोटिस | "पहले ___ महीने कोई पक्ष समाप्त नहीं करेगा; उसके बाद ___ महीने का लिखित नोटिस" | लॉक-इन तोड़ने पर क्या होगा (जैसे लॉक-इन के बचे महीनों का किराया), साफ लिखें। |
| 12. निरीक्षण | पहले से सूचना देकर उचित समय पर मालिक निरीक्षण कर सकेगा | बिना सूचना प्रवेश की शर्त विवाद पैदा करती है। |
| 13. खाली करना और रिन्यूअल | अवधि पूरी होने पर कब्ज़ा लौटाना; रिन्यूअल नए एग्रीमेंट से, नए किराए पर | नया एग्रीमेंट मतलब नई स्टाम्प ड्यूटी। अवधि 1 साल से ज़्यादा हो तो रजिस्ट्रेशन। |
| 14. हस्ताक्षर | दोनों पक्ष और दो गवाह (नाम-पता के साथ) | हर पेज पर दोनों के हस्ताक्षर/initial। e-Sign हो तो हर पक्ष अपने Aadhaar OTP से साइन करता है। |
साथ में लगाएं: सामान की सूची (Annexure)
फर्निश्ड या सेमी-फर्निश्ड घर में एक अलग सूची बनाएं और दोनों साइन करें:
- हर सामान का नाम, संख्या और हालत (नया/ठीक/खराब)
- बिजली और पानी मीटर की शुरुआती रीडिंग
- दी गई चाबियों की संख्या (मुख्य दरवाज़ा, लेटरबॉक्स, पार्किंग रिमोट)
- शिफ्ट होने के दिन की तस्वीरें; तारीख के साथ दोनों के पास रखें
रेंट एग्रीमेंट की 9 आम गलतियां
- स्टाम्प ड्यूटी कम लगाना: "₹100 के पेपर पर सब चलता है" मान लेना। दर राज्य का कानून तय करता है।
- तारीख का मेल न होना: स्टाम्प पेपर/e-Stamp एक नाम पर और एग्रीमेंट दूसरे नाम से, या स्टाम्प की तारीख के महीनों बाद साइन।
- 1 साल से लंबा एग्रीमेंट, पर रजिस्ट्रेशन नहीं: नोटरी को रजिस्ट्रेशन मान लेना।
- डिपॉज़िट लौटाने की शर्त न लिखना: लिखा न हो तो खाली करते समय विवाद होता है।
- संपत्ति का अधूरा पता: फ्लोर, फ्लैट नंबर या पिन कोड छूट जाना।
- मालिक की जगह कोई और साइन करे: बिना अधिकार पत्र के रिश्तेदार या एजेंट का साइन।
- गवाह न होना या अधूरे हस्ताक्षर: हर पेज पर initial न होना।
- हाथ से काट-छांट: रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 20 के अनुसार रजिस्ट्रिंग अधिकारी ऐसा दस्तावेज़ लेने से मना कर सकता है जिसमें काट-छांट, खाली जगह या बदलाव पर साइन करने वालों के हस्ताक्षर/initial न हों। गलती हो तो नया प्रिंट बेहतर है।
- पुलिस को जानकारी न देना: कई राज्यों में किरायेदार की जानकारी पुलिस को देने की व्यवस्था है; देखें पुलिस वेरिफिकेशन।
सरकारी मॉडल फॉर्मेट कहां मिलते हैं
कुछ राज्यों के पंजीकरण विभाग अपनी वेबसाइट पर मॉडल लीज़ डीड देते हैं। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट igrsup.gov.in पर "मॉडल डीड" में "109 पट्टा (30 वर्ष या कम अवधि का)" और अंग्रेज़ी में "109 Lease Deed (30 years or of less period)" उपलब्ध हैं। UP में 12 माह तक का किरायानामा विभाग के पोर्टल पर अपने-आप तैयार होता है (देखें UP गाइड)।
मॉडल फॉर्मेट शुरुआत के लिए अच्छे हैं, पर उनमें अपनी शर्तें (लॉक-इन, फर्नीचर सूची, बिल) जोड़नी पड़ती हैं। ऊंचे किराए, कमर्शियल जगह या लंबी अवधि के एग्रीमेंट वकील से जंचवाएं।
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 4 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रेंट एग्रीमेंट में कौन-कौन से क्लॉज़ ज़रूरी हैं?
पार्टियों का विवरण, संपत्ति का पूरा पता, अवधि (शुरू और खत्म की तारीख), मासिक किराया और भुगतान की तारीख, सिक्योरिटी डिपॉज़िट और उसकी वापसी, बिल और मरम्मत की ज़िम्मेदारी, नोटिस पीरियड, इस्तेमाल की शर्त, और दोनों पक्षों व दो गवाहों के हस्ताक्षर।
रेंट एग्रीमेंट कितने रुपये के स्टाम्प पेपर पर बनता है?
कोई एक राशि पूरे देश में लागू नहीं है। स्टाम्प ड्यूटी राज्य के स्टाम्प कानून से तय होती है और अक्सर अवधि, किराए और डिपॉज़िट पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए गुजरात में 1 साल से कम के रिहायशी लीज़ पर ₹500 है। अपने राज्य का पेज देखें।
क्या हिंदी में रेंट एग्रीमेंट बनाया जा सकता है?
हां, एग्रीमेंट उस भाषा में बन सकता है जो दोनों पक्ष समझते हों। रजिस्ट्रेशन कराना हो तो ध्यान रखें: रजिस्ट्रेशन एक्ट की धारा 19 के अनुसार अगर दस्तावेज़ ऐसी भाषा में है जिसे रजिस्ट्रिंग अधिकारी नहीं समझता और जो ज़िले में आम तौर पर इस्तेमाल नहीं होती, तो उसके साथ ज़िले की आम भाषा में सही अनुवाद और एक सही कॉपी लगानी होती है।
क्या एग्रीमेंट में किरायेदार का पूरा आधार नंबर लिखना ज़रूरी है?
कानून में ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं कि पूरा आधार नंबर लिखा ही जाए। पहचान के लिए पहचान पत्र का प्रकार और आखिरी कुछ अंक लिखना सुरक्षित तरीका है। अगर कोई सरकारी पोर्टल (जैसे UP का किरायानामा पोर्टल) आधार e-KYC मांगता है, तो वह प्रक्रिया पोर्टल पर ही होती है।
लॉक-इन पीरियड क्या होता है?
लॉक-इन वह शुरुआती समय है जिसमें कोई पक्ष एग्रीमेंट खत्म नहीं कर सकता। इसे तोड़ने पर क्या देना होगा, यह एग्रीमेंट में साफ लिखें। यह कानूनी अनिवार्यता नहीं, आपसी शर्त है।
क्या ऑनलाइन बना रेंट एग्रीमेंट मान्य है?
हां, अगर उस पर राज्य के नियम के अनुसार सही स्टाम्प ड्यूटी दी गई है और दोनों पक्षों ने मान्य तरीके से साइन किया है। IT Act की धारा 3A और दूसरी अनुसूची के तहत Aadhaar e-Sign मान्य इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर है। जहां रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है वहां वह राज्य की प्रक्रिया से अलग से होगा।
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