पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना: किन बच्चों को भोजन, कितना पोषण, शिकायत कहां करें

✓ जानकारी जांची गई: 15 अक्टूबर 2026

सीधा जवाब

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN), जिसे पहले मिड-डे मील कहा जाता था, शिक्षा मंत्रालय की केंद्र प्रायोजित योजना है। इसमें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका (प्री-प्राइमरी) और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को स्कूल के दिनों में एक बार गर्म पका भोजन मुफ्त मिलता है। इसके लिए कोई आवेदन नहीं करना होता; स्कूल में दाखिला ही काफी है।

कौन से बच्चे
बालवाटिका और कक्षा 1-8 (सरकारी/सहायता प्राप्त स्कूल)
क्या मिलता है
हर स्कूल दिवस एक गर्म पका भोजन, मुफ्त
आवेदन
ज़रूरी नहीं; स्कूल में दाखिला काफी
मंत्रालय
शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग)

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योजना क्या है

इस योजना के दो मकसद हैं: बच्चों का पोषण सुधारना और गरीब परिवारों के बच्चों को नियमित स्कूल आने के लिए प्रेरित करना। भोजन बिना किसी लिंग या सामाजिक भेदभाव के सभी पात्र बच्चों को मिलता है।

  • कहां लागू: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त (aided) स्कूल।
  • कौन बच्चे: कक्षा 1 से 8 और प्राइमरी स्कूलों की बालवाटिका/प्री-प्राइमरी कक्षा।
  • खर्च: केंद्र और राज्य मिलकर खर्च उठाते हैं; अनाज केंद्र सरकार देती है।
  • प्राइवेट (बिना सहायता वाले) स्कूलों के बच्चे इस योजना में नहीं आते।

हर बच्चे को कितना पोषण मिलना चाहिए

मानक (प्रति बच्चा, प्रति दिन)प्राइमरी (कक्षा 1-5)अपर प्राइमरी (कक्षा 6-8)
कैलोरी450700
प्रोटीन12 ग्राम20 ग्राम
अनाज100 ग्राम150 ग्राम
दाल20 ग्राम30 ग्राम
सब्ज़ी50 ग्राम75 ग्राम
तेल/वसा5 ग्राम7.5 ग्राम

नमक और मसाले ज़रूरत के हिसाब से। कई राज्य अपने पैसे से दूध, अंडा, फल या दूसरी चीज़ें भी जोड़ते हैं, इसलिए मेन्यू राज्य के हिसाब से अलग होता है।

खाना पकाने की लागत (material cost)

अनाज के अलावा दाल, सब्ज़ी, तेल, मसाले और ईंधन के लिए प्रति बच्चा प्रति दिन तय राशि मिलती है। 1 मई 2025 से यह 9.5% बढ़ाई गई:

कक्षाप्रति बच्चा प्रति दिन (1 मई 2025 से)
बालवाटिका और प्राइमरी₹6.78
अपर प्राइमरी₹10.17

यह राशि स्कूल को खाना बनाने के लिए मिलती है, बच्चों या माता-पिता को नकद नहीं दी जाती। राज्य इससे ज़्यादा राशि भी जोड़ सकते हैं।

योजना की अवधि

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2021 में PM POSHAN को 2021-22 से 2025-26 के लिए मंज़ूरी दी थी।
  • 2026-27 और आगे की अवधि की आधिकारिक घोषणा के लिए शिक्षा मंत्रालय/PIB की सूचना देखें। 15 अक्टूबर 2026 तक हमें इसकी आधिकारिक अधिसूचना नहीं मिली।

भोजन न मिले या खराब हो तो

  1. पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) को बताएं। माता-पिता SMC के सदस्य बन सकते हैं।
  2. हल न हो तो ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) या ज़िला शिक्षा कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
  3. कई राज्यों में मिड-डे मील की अलग हेल्पलाइन या शिकायत पोर्टल है; राज्य के शिक्षा विभाग की वेबसाइट देखें।
  4. खाने से बच्चे बीमार हों तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं और स्कूल व ज़िला प्रशासन को सूचना दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीएम पोषण योजना में किन बच्चों को खाना मिलता है?

सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक और बालवाटिका/प्री-प्राइमरी के सभी बच्चों को।

क्या इसके लिए आवेदन करना होता है?

नहीं। स्कूल में दाखिला होने पर बच्चे को अपने आप भोजन मिलता है।

एक बच्चे के खाने पर कितना खर्च तय है?

1 मई 2025 से खाना पकाने की लागत (अनाज के अलावा) बालवाटिका/प्राइमरी के लिए ₹6.78 और अपर प्राइमरी के लिए ₹10.17 प्रति बच्चा प्रति दिन है।

क्या प्राइवेट स्कूल के बच्चों को मिड-डे मील मिलता है?

नहीं, सिर्फ सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को।

मिड-डे मील और PM POSHAN में क्या फर्क है?

कोई फर्क नहीं। 2021 में मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर PM POSHAN किया गया और इसमें बालवाटिका के बच्चे भी जोड़े गए।

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