मिड-डे मील (PM POSHAN) शिकायत पत्र 2026: खाना न मिले या खराब हो

✓ जानकारी जांची गई: 17 अक्टूबर 2026📢 शिकायत पत्र

सीधा जवाब

सरकारी और सरकारी-सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका और कक्षा 1 से 8 के बच्चों को हर स्कूल दिवस पर एक गर्म पका हुआ भोजन मुफ्त मिलना बच्चे का कानूनी हक है (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, धारा 5)। खाना न बने तो मिड-डे मील नियम 2015 के तहत राज्य को खाद्य सुरक्षा भत्ता देना होता है। खाना न मिले, कम या खराब मिले, या बनाने की जगह गंदी हो, तो यह पत्र प्रधानाध्यापक और खंड/ज़िला शिक्षा अधिकारी को दें।

कानूनी हक
NFSA 2013 धारा 5(1)(b); मिड-डे मील नियम 2015
किसे दें
प्रधानाध्यापक, फिर खंड/ज़िला शिक्षा अधिकारी (PM POSHAN प्रभारी)
खाना न मिले तो
खाद्य सुरक्षा भत्ता: अगले महीने की 15 तारीख तक
निगरानी
विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC); ज़िला शिकायत निवारण अधिकारी (NFSA धारा 15)

अपना मिड-डे मील शिकायत बनाएं

नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।

यह पत्र कब काम आता है

  • कई दिनों से स्कूल में खाना नहीं बन रहा
  • खाना कम, कच्चा, बेस्वाद या मेन्यू के हिसाब से नहीं है
  • खाने में कीड़े/गंदगी मिली या बच्चे बीमार पड़े
  • रसोई गंदी है, पीने का साफ पानी नहीं, या बच्चों से बर्तन धुलवाए जाते हैं
  • बच्चों के साथ जाति या किसी और आधार पर भेदभाव होता है

किसे लिखें: पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक और विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अध्यक्ष को। सुनवाई न हो या मामला गंभीर हो तो खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) या ज़िला शिक्षा/बेसिक शिक्षा अधिकारी को, जो ज़िले में PM POSHAN देखते हैं; कॉपी ज़िलाधिकारी को।

साथ में क्या लगाएं

  • खाने, रसोई या पानी की फोटो/वीडियो (तारीख के साथ)
  • दूसरे अभिभावकों/SMC सदस्यों के नाम और हस्ताक्षर (सामूहिक शिकायत ज़्यादा असर करती है)
  • बच्चे बीमार हुए हों तो डॉक्टर/अस्पताल की पर्ची
  • पहले स्कूल को दी गई शिकायत की रिसीविंग, अगर दी हो

कैसे और कहां जमा करें

  1. पहले प्रधानाध्यापक और SMC अध्यक्ष से बात करें; SMC की बैठक में मुद्दा उठवाएं और कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज करवाएं।
  2. सुधार न हो तो यह पत्र खंड शिक्षा अधिकारी/ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करें और रिसीविंग लें; चाहें तो रजिस्टर्ड डाक से भेजें।
  3. कई राज्यों में मिड-डे मील का टोल-फ्री नंबर या CM हेल्पलाइन है; वहां भी शिकायत दर्ज कर शिकायत संख्या संभालें।
  4. भत्ता/कार्रवाई न मिले तो ज़िले के ज़िला शिकायत निवारण अधिकारी (NFSA धारा 15) या ज़िलाधिकारी को लिखें, फिर राज्य खाद्य आयोग में।

ध्यान दें

  • खाना खाकर बच्चे बीमार हों तो पत्र का इंतज़ार न करें: तुरंत 108/112 पर कॉल करें और नज़दीकी अस्पताल ले जाएं।
  • किसी व्यक्ति पर निजी आरोप लगाने के बजाय तारीख और तथ्य लिखें।
  • मेन्यू स्कूल की दीवार पर लिखा होना चाहिए; उसकी फोटो लेकर लगाएं।
  • बच्चों से खाना बनवाना या बर्तन धुलवाना गलत है; ऐसा हो तो पत्र में ज़रूर लिखें।

यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।

शिकायत पत्र: और फॉर्मेट

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मिड-डे मील की शिकायत कहां करें?

पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक और SMC को, फिर खंड/ज़िला शिक्षा अधिकारी को लिखित में। कई राज्यों में मिड-डे मील का टोल-फ्री नंबर या CM हेल्पलाइन भी है।

स्कूल में खाना न बने तो बच्चों को क्या मिलता है?

मिड-डे मील नियम 2015 के अनुसार खाना न मिलने पर राज्य सरकार बच्चे को खाद्य सुरक्षा भत्ता देती है, जो अगले महीने की 15 तारीख तक दिया जाना चाहिए।

मिड-डे मील किन बच्चों को मिलता है?

सरकारी और सरकारी-सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को, हर स्कूल दिवस पर एक गर्म पका भोजन।

खाने की गुणवत्ता कौन जांचता है?

नियम के अनुसार परोसने से पहले कम से कम एक शिक्षक समेत 2-3 वयस्क (SMC सदस्य) खाना चखते हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति गुणवत्ता और सफाई की निगरानी करती है।

शिकायत पर कार्रवाई न हो तो?

ज़िलाधिकारी या ज़िला शिकायत निवारण अधिकारी (NFSA) को लिखें। RTI से अपनी शिकायत पर कार्रवाई और स्कूल के भोजन रजिस्टर की जानकारी भी मांग सकते हैं।

दूसरे आवेदन पत्र

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