उपभोक्ता शिकायत पत्र 2026: दुकान या कंपनी को लिखित शिकायत
सीधा जवाब
खराब सामान, वारंटी में मरम्मत से इनकार, सेवा में कमी या ज़्यादा पैसा वसूलने पर पहले दुकानदार/कंपनी को लिखित शिकायत दें और एक तय समय में हल मांगें। यही पत्र आगे राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 और उपभोक्ता आयोग में सबूत बनता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 69 के अनुसार आयोग में केस 2 साल के अंदर करना होता है; ₹50 लाख तक के मामले जिला उपभोक्ता आयोग में जाते हैं।
अपना उपभोक्ता शिकायत पत्र बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- नया सामान खराब निकला या जल्दी खराब हो गया
- वारंटी/गारंटी में मरम्मत या बदलने से मना किया गया
- पैसे लेकर सेवा (मरम्मत, इंस्टॉलेशन, कूरियर, कोचिंग आदि) ठीक से नहीं दी
- MRP से ज़्यादा पैसा लिया या बिल नहीं दिया
किसे लिखें: जिस दुकान/डीलर से सामान लिया उसके मालिक को, और साथ में कंपनी (निर्माता/सेवा देने वाली) के शिकायत अधिकारी / Grievance Officer को। कंपनी का पता और ईमेल बिल, वारंटी कार्ड या कंपनी की वेबसाइट पर मिलता है।
साथ में क्या लगाएं
- बिल/इनवॉइस की कॉपी (असली अपने पास रखें)
- वारंटी/गारंटी कार्ड की कॉपी
- कस्टमर केयर शिकायत नंबर, सर्विस जॉब शीट, ईमेल/चैट के स्क्रीनशॉट
- खराबी की फोटो या वीडियो
कैसे और कहां जमा करें
- पत्र दुकान पर हाथ से दें और कॉपी पर रिसीविंग लें, या कंपनी के पते पर स्पीड पोस्ट/रजिस्टर्ड डाक से भेजें। कंपनी के ग्राहक सेवा ईमेल पर भी भेजें।
- तय दिनों में जवाब न आए तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत करें: 1915 पर कॉल, WhatsApp 8800001915 या consumerhelpline.gov.in। हेल्पलाइन शिकायत कंपनी तक पहुंचाकर हल कराने की कोशिश करती है।
- फिर भी हल न हो तो जिला उपभोक्ता आयोग में केस करें; e-Jagriti पोर्टल से ऑनलाइन दायर हो जाता है। वकील ज़रूरी नहीं।
- आयोग में केस समस्या शुरू होने से 2 साल के अंदर करें।
ध्यान दें
- शिकायत में तारीखें, बिल नंबर और पहले की शिकायत संख्या ज़रूर लिखें।
- गुस्से या धमकी की भाषा न लिखें; शांत और तथ्यों वाला पत्र आयोग में ज़्यादा काम आता है।
- बिल और खराब सामान संभाल कर रखें, उसे फेंकें या खुद न खुलवाएं।
- फोन पर हुई बात का भी सार ईमेल से भेज दें, ताकि लिखित सबूत रहे।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
शिकायत पत्र: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खराब सामान की शिकायत सबसे पहले कहां करें?
पहले दुकानदार और कंपनी को लिखित शिकायत दें। हल न हो तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या WhatsApp 8800001915 पर शिकायत करें।
उपभोक्ता आयोग में केस कितने समय में करना होता है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 69 के अनुसार समस्या (कारण) होने के 2 साल के अंदर।
किस आयोग में केस करें?
सामान/सेवा की कीमत ₹50 लाख तक हो तो जिला आयोग, ₹50 लाख से ₹2 करोड़ तक राज्य आयोग, उससे ऊपर राष्ट्रीय आयोग।
क्या उपभोक्ता आयोग में वकील ज़रूरी है?
नहीं। उपभोक्ता खुद अपना केस दायर कर सकता है और e-Jagriti पोर्टल से ऑनलाइन भी कर सकता है।
आयोग में केस की फीस कितनी है?
₹5 लाख तक के दावे पर फीस नहीं लगती; उससे ऊपर दावे की रकम के हिसाब से फीस है। केस दायर करते समय e-Jagriti पर मौजूदा फीस देख लें।
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