ज़मीन पर अवैध कब्ज़े की शिकायत का पत्र 2026
सीधा जवाब
आपकी ज़मीन या मकान पर कोई ज़बरदस्ती कब्ज़ा करे, दीवार/मेड़ खिसकाए या निर्माण करे तो तहसीलदार/SDM को शिकायत दें; धमकी या ज़बरदस्ती घुसने का मामला हो तो थाने में भी। ज़बरदस्ती घुसना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329 (आपराधिक अतिचार) में अपराध है। झगड़े से शांति भंग होने का खतरा हो तो SDM BNSS की धारा 164 में कब्ज़े की जांच कर सकते हैं। मालिकाना हक का अंतिम फैसला राजस्व/सिविल कोर्ट करता है।
- किसे दें
- तहसीलदार / SDM; अपराध हो तो थाना प्रभारी
- अपराध
- BNS धारा 329: आपराधिक अतिचार
- शांति भंग का खतरा
- BNSS धारा 164: SDM की कार्यवाही
- सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा
- तहसीलदार (राज्य का भू-राजस्व कानून)
पुलिस और SDM कब्ज़े और शांति व्यवस्था पर कार्रवाई करते हैं, पर मालिकाना हक का फैसला राजस्व न्यायालय या सिविल कोर्ट ही करता है। राज्य के कानून और धाराएं अलग हैं; वकील से सलाह लें।
अपना अवैध कब्ज़ा शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- पड़ोसी या कोई और आपकी ज़मीन पर मेड़/दीवार खिसकाकर कब्ज़ा कर रहा है
- खाली प्लॉट या खेत पर बिना अनुमति निर्माण या खेती की जा रही है
- ज़मीन से हटाने के लिए धमकी या ज़बरदस्ती की जा रही है
- सरकारी/सार्वजनिक ज़मीन (रास्ता, चरागाह, तालाब) पर कब्ज़ा हुआ है
किसे लिखें: ज़मीन वाली तहसील के तहसीलदार या उप-ज़िला मजिस्ट्रेट (SDM) को; मारपीट, धमकी या ज़बरदस्ती घुसने पर इलाके के थाना प्रभारी (SHO) को भी। एक ही पत्र दोनों को दे सकते हैं, बस "सेवा में" बदलें।
साथ में क्या लगाएं
- ताज़ा खतौनी/जमाबंदी/7-12 की नकल जिसमें आपका नाम हो
- बैनामा/रजिस्ट्री, विरासत/नामांतरण आदेश
- कब्ज़े या निर्माण की तारीख वाली फोटो/वीडियो; गवाहों के नाम
- पहले की पैमाइश/सीमांकन रिपोर्ट या नक्शा (सीमा विवाद में बहुत काम आता है)
कैसे और कहां जमा करें
- तहसील दिवस/संपूर्ण समाधान दिवस या तहसीलदार/SDM कार्यालय में पत्र जमा करें और रिसीविंग लें; कई राज्यों में जनसुनवाई पोर्टल/CM हेल्पलाइन पर ऑनलाइन भी शिकायत होती है।
- धमकी, मारपीट या ज़बरदस्ती घुसने पर तुरंत 112 पर कॉल करें और थाने में लिखित शिकायत देकर FIR की मांग करें।
- थाना FIR न लिखे तो SP को शिकायत भेजें: SP को शिकायत का फॉर्मेट।
- सीमा साफ न हो तो पहले सीमांकन (नापजोख) का आवेदन दें; पैमाइश रिपोर्ट से कब्ज़ा साबित होता है।
- निजी ज़मीन पर कब्ज़ा न हटे तो सिविल कोर्ट में स्थायी निषेधाज्ञा (injunction)/कब्ज़ा वापसी का मुकदमा करें; मुफ्त वकील के लिए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (हेल्पलाइन 15100)।
ध्यान दें
- खुद ज़बरदस्ती कब्ज़ा हटाने या मारपीट न करें; उल्टा आप पर केस हो सकता है।
- हर शिकायत की रिसीविंग और तारीख संभालें; बाद में अदालत में काम आती है।
- कब्ज़ा होते ही जल्दी शिकायत करें; लंबे समय तक चुप रहने से मामला कमज़ोर होता है।
- ज़मीन बेचने/खरीदने में भी खतौनी और मौके का कब्ज़ा दोनों जांचें।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
ज़मीन, तहसील और किसान: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ज़मीन पर अवैध कब्ज़े की शिकायत कहां करें?
तहसीलदार या SDM को लिखित शिकायत दें; धमकी या ज़बरदस्ती हो तो थाने में भी। कई राज्यों में जनसुनवाई/CM हेल्पलाइन पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत होती है।
अवैध कब्ज़े पर कौन सी धारा लगती है?
ज़बरदस्ती घुसना भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 329 (आपराधिक अतिचार) में आता है। धोखाधड़ी, धमकी या मारपीट हो तो अन्य धाराएं भी लगती हैं।
SDM ज़मीन के झगड़े में क्या कर सकते हैं?
अगर विवाद से शांति भंग होने का खतरा है, तो BNSS 2023 की धारा 164 (पुरानी CrPC 145) के तहत SDM जांच करके तय कर सकते हैं कि असल कब्ज़ा किसका है, जब तक अदालत फैसला न करे।
सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े की शिकायत कैसे करें?
तहसीलदार को लिखित शिकायत दें; राज्य के भू-राजस्व कानून में तहसीलदार को बेदखली का अधिकार है (जैसे UP में धारा 67)।
कब्ज़ा न हटे तो क्या करें?
सिविल कोर्ट में निषेधाज्ञा या कब्ज़ा वापसी का मुकदमा करें। गरीब, महिला, SC/ST और कई अन्य लोगों को ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त वकील मिलता है।
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