थाने में FIR दर्ज न होने पर SP को शिकायत पत्र 2026 (BNSS धारा 173(4))
सीधा जवाब
संज्ञेय अपराध (जैसे चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी) की सूचना देने पर भी थाना FIR न लिखे, तो नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 173(4) के तहत आप पूरी घटना लिखित में, डाक से ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) को भेज सकते हैं। SP संतुष्ट हों तो खुद जांच करेंगे या किसी अधिकारी से जांच कराएंगे। इसके बाद भी कार्रवाई न हो तो धारा 175(3) के तहत शपथ पत्र के साथ मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया जा सकता है।
- कानून
- BNSS 2023 धारा 173(4) (1 जुलाई 2024 से लागू)
- किसे भेजें
- ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) / वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक; कमिश्नरेट में DCP
- कैसे भेजें
- लिखित में, डाक से (रजिस्टर्ड/स्पीड पोस्ट); रसीद संभालें
- अगला कदम
- धारा 175(3): SP को भेजे आवेदन की कॉपी और शपथ पत्र के साथ मजिस्ट्रेट को आवेदन
यह पत्र कानूनी सलाह नहीं है। गंभीर मामलों (जान का खतरा, बड़ी रकम, महिला/बच्चों से जुड़े अपराध) में वकील या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ्त कानूनी मदद लें।
अपना FIR न लिखे तो SP को शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- थाने ने संज्ञेय अपराध की शिकायत लेकर भी FIR दर्ज नहीं की
- थाने ने 'इलाका हमारा नहीं' कहकर लौटा दिया (BNSS में ज़ीरो FIR का प्रावधान है)
- सिर्फ आवेदन की रिसीविंग दी, पर FIR नंबर नहीं दिया
- प्रारंभिक जांच के नाम पर 14 दिन से ज़्यादा टाला जा रहा है
किसे लिखें: जिस ज़िले का थाना है, उसके पुलिस अधीक्षक (SP) / वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को। जिन शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली है, वहां संबंधित ज़ोन के पुलिस उपायुक्त (DCP) या पुलिस आयुक्त को।
साथ में क्या लगाएं
- थाने में दी गई लिखित शिकायत की कॉपी, जिस पर रिसीविंग/मुहर हो
- सबूत: फोटो, वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, बिल, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट (मूल नहीं, कॉपी)
- गवाहों के नाम और मोबाइल नंबर
- अपने पहचान पत्र की कॉपी
कैसे और कहां जमा करें
- पत्र प्रिंट करके हस्ताक्षर करें, सबूतों की कॉपी लगाएं और रजिस्टर्ड डाक / स्पीड पोस्ट से SP दफ्तर भेजें (धारा 173(4) में डाक से भेजना लिखा है)। चाहें तो एक कॉपी SP दफ्तर में हाथ से देकर रिसीविंग भी लें।
- डाक की रसीद और ट्रैकिंग का प्रिंट संभाल कर रखें; यही आगे मजिस्ट्रेट के पास सबूत बनेगा।
- कई राज्यों में SP/पुलिस का ऑनलाइन शिकायत पोर्टल या ईमेल भी है; उस पर भी भेज सकते हैं, पर डाक वाला रास्ता न छोड़ें।
- उचित समय में कार्रवाई न हो तो धारा 175(3) BNSS के तहत SP को भेजे आवेदन की कॉपी और शपथ पत्र के साथ क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें; इसके लिए वकील या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की मुफ्त कानूनी सहायता ले सकते हैं।
ध्यान दें
- घटना तारीख, समय, जगह और नाम के साथ क्रम से लिखें; अंदाज़े और गुस्से वाली भाषा से बचें।
- झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर लिखी शिकायत खुद आपके खिलाफ अपराध बन सकती है।
- संज्ञेय अपराध में थाना 'इलाका हमारा नहीं' कहकर मना नहीं कर सकता; ज़ीरो FIR दर्ज होकर सही थाने भेजी जाती है।
- 3 से 7 साल की सज़ा वाले अपराधों में पुलिस 14 दिन की प्रारंभिक जांच कर सकती है; उसके बाद फैसला लिखित में मांगें।
- तुरंत खतरा हो तो पत्र का इंतज़ार न करें, 112 पर कॉल करें।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
पुलिस को आवेदन: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
थाना FIR न लिखे तो क्या करें?
BNSS धारा 173(4) के तहत घटना का पूरा विवरण लिखित में डाक से ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें। SP खुद जांच कर सकते हैं या किसी अधिकारी को जांच का आदेश दे सकते हैं।
SP भी कार्रवाई न करे तो?
BNSS धारा 175(3) के तहत क्षेत्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें। साथ में SP को भेजे आवेदन की कॉपी (डाक रसीद सहित) और शपथ पत्र लगाना होता है। मजिस्ट्रेट पुलिस का पक्ष सुनकर जांच का आदेश दे सकते हैं।
क्या दूसरे इलाके के थाने में FIR हो सकती है?
हां। BNSS धारा 173(1) के अनुसार सूचना 'अपराध किसी भी इलाके में हुआ हो' दी जा सकती है; इसे ज़ीरो FIR कहते हैं, जो बाद में सही थाने को भेजी जाती है।
क्या ऑनलाइन FIR (e-FIR) हो सकती है?
BNSS में इलेक्ट्रॉनिक सूचना का प्रावधान है; ऐसी सूचना पर 3 दिन के अंदर थाने जाकर हस्ताक्षर करने होते हैं। कई राज्य कुछ मामलों (जैसे वाहन/मोबाइल चोरी) में e-FIR लेते हैं।
FIR दर्ज न करने पर पुलिस पर कार्रवाई होती है?
महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध, एसिड अटैक जैसे कुछ अपराधों में सूचना दर्ज न करना BNS धारा 199 के तहत अपराध है। बाकी मामलों में SP या मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकते हैं।
दूसरे आवेदन पत्र
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