गुमशुदा व्यक्ति की शिकायत पत्र 2026: थाने में तुरंत रिपोर्ट करें
सीधा जवाब
कोई व्यक्ति या बच्चा गुम हो जाए तो तुरंत नज़दीकी थाने में रिपोर्ट करें; 24 घंटे इंतज़ार करने का कोई कानून नहीं है। सुप्रीम कोर्ट (बचपन बचाओ आंदोलन केस, 2013) के आदेश के अनुसार गुमशुदा बच्चे की हर शिकायत पर FIR दर्ज होती है। BNSS धारा 173 के तहत किसी भी थाने में सूचना दी जा सकती है। बच्चों के लिए सरकार का TrackChild / खोया-पाया पोर्टल और 1098 हेल्पलाइन भी है। नीचे जानकारी भरकर पत्र तैयार करें और ताज़ा फोटो साथ लगाएं।
- कब रिपोर्ट करें
- तुरंत; 24 घंटे रुकने का नियम नहीं
- किसे दें
- नज़दीकी थाना प्रभारी (कोई भी थाना, ज़ीरो FIR)
- बच्चा गुम
- FIR अनिवार्य (सुप्रीम कोर्ट, 2013); 1098 पर भी बताएं
- हेल्पलाइन
- 112 (आपातकाल), 1098 (बच्चे)
अपना गुमशुदगी की शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- बच्चा स्कूल/ट्यूशन/खेलने गया और घर नहीं लौटा
- बुज़ुर्ग (खासकर भूलने की बीमारी वाले) घर से निकले और लापता हैं
- परिवार का सदस्य काम/यात्रा पर गया और फोन बंद है, संपर्क नहीं हो रहा
- किसी के बहला-फुसलाकर ले जाने या अपहरण का शक है
किसे लिखें: जहां व्यक्ति आखिरी बार देखा गया या जहां आप रहते हैं, उस थाने के प्रभारी (SHO) को। जल्दी में किसी भी नज़दीकी थाने में दे सकते हैं; वह सही थाने को भेजेगा।
साथ में क्या लगाएं
- गुमशुदा की ताज़ा, साफ फोटो (2-3 प्रिंट और मोबाइल में डिजिटल कॉपी)
- गुमशुदा का आधार/स्कूल ID/कोई पहचान पत्र, अगर मिल सके
- मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया अकाउंट, दोस्तों के नंबर की सूची
- बीमारी हो (जैसे भूलने की बीमारी, मानसिक रोग) तो डॉक्टर का पर्चा
कैसे और कहां जमा करें
- देर न करें: तुरंत 112 पर सूचना दें और नज़दीकी थाने में यह पत्र फोटो के साथ जमा करें। FIR/रिपोर्ट नंबर और जांच अधिकारी का नाम-नंबर लें।
- बच्चा गुम हो तो 1098 पर भी बताएं और TrackChild पोर्टल के खोया-पाया हिस्से में जानकारी डालें।
- कई राज्यों के पुलिस सिटिजन पोर्टल पर गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट और 'अज्ञात शव/मिले व्यक्ति' की खोज की सुविधा है; उसे भी देखें।
- थाना रिपोर्ट न ले या टाले, तो तुरंत क्षेत्राधिकारी/पुलिस अधीक्षक को लिखें; बच्चे के मामले में ज़िला बाल संरक्षण इकाई/बाल कल्याण समिति को भी बताएं।
ध्यान दें
- आखिरी बार पहने कपड़े, चप्पल, बैग का रंग ज़रूर लिखें; यही पहचान में सबसे ज़्यादा काम आते हैं।
- सोशल मीडिया पर फोटो डालें तो अपना पूरा पता न डालें, सिर्फ थाने और अपना नंबर दें।
- फिरौती का फोन आए तो पुलिस को तुरंत बताएं; खुद पैसे न भेजें।
- व्यक्ति मिल जाए तो थाने को ज़रूर बताएं, ताकि रिपोर्ट बंद हो सके।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
पुलिस को आवेदन: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गुमशुदगी की रिपोर्ट के लिए 24 घंटे इंतज़ार करना पड़ता है?
नहीं। ऐसा कोई कानून नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 2024 में साफ कहा कि गुमशुदा के मामले में पुलिस तुरंत जांच शुरू करे। जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, ढूंढना उतना आसान होगा।
बच्चा गुम हो जाए तो FIR होती है या सिर्फ रिपोर्ट?
सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में बचपन बचाओ आंदोलन केस में आदेश दिया कि गुमशुदा बच्चे की हर शिकायत FIR के रूप में दर्ज हो और तुरंत जांच शुरू हो।
किस थाने में रिपोर्ट करें?
जहां व्यक्ति आखिरी बार देखा गया, वहां का थाना सबसे सही है, पर आप किसी भी नज़दीकी थाने में सूचना दे सकते हैं (BNSS धारा 173, ज़ीरो FIR)।
गुमशुदा बच्चे की ऑनलाइन जानकारी कहां दें?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के TrackChild पोर्टल (trackthemissingchild.gov.in) के खोया-पाया हिस्से में, और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर।
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