घरेलू हिंसा शिकायत आवेदन 2026: संरक्षण अधिकारी / पुलिस को पत्र
सीधा जवाब
पति, ससुराल वाले या साथ रहने वाला घर का कोई सदस्य मारपीट, गाली, धमकी, दहेज के लिए परेशान करे, पैसे रोके या घर से निकाले, तो घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत ज़िले के संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) को यह आवेदन दें। वे घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) बनाकर मजिस्ट्रेट को भेजते हैं, जो संरक्षण, घर में रहने, खर्च (भरण-पोषण) और बच्चों की कस्टडी का आदेश दे सकते हैं। मारपीट/क्रूरता पर पुलिस में BNS धारा 85 में FIR भी हो सकती है। तुरंत खतरा हो तो 112 या 181 पर कॉल करें।
- कानून
- घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (धारा 12, 18-23); BNS धारा 85
- किसे दें
- ज़िले के संरक्षण अधिकारी; पुलिस (थाना/महिला थाना); सीधे मजिस्ट्रेट
- समय
- पहली सुनवाई आम तौर पर 3 दिन में; फैसला पहली सुनवाई से 60 दिन में
- हेल्पलाइन
- 181 (महिला हेल्पलाइन), 112, वन स्टॉप सेंटर (सखी)
आप खतरे में हैं तो यह पत्र लिखने में समय न लगाएं: तुरंत 112 (आपातकाल) या 181 (महिला हेल्पलाइन, 24 घंटे, मुफ्त) पर कॉल करें। यह पत्र कानूनी सलाह नहीं है।
अपना घरेलू हिंसा शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- पति/ससुराल वाले मारपीट, गाली-गलौज या धमकी देते हैं
- दहेज या पैसे के लिए परेशान किया जा रहा है
- घर से निकाल दिया या घर में आने नहीं दिया जा रहा
- खर्च, गहने (स्त्रीधन) या बच्चों से मिलने से रोका जा रहा है
किसे लिखें: अपने ज़िले के संरक्षण अधिकारी को (आम तौर पर ज़िला महिला एवं बाल विकास/ज़िला प्रोबेशन कार्यालय में बैठते हैं), या नज़दीकी थाना प्रभारी / महिला थाना को। पत्र में दोनों के लिए जगह है; ऊपर 'किसे' वाले खाने में सही पद लिखें। वन स्टॉप सेंटर (सखी) भी आवेदन लिखने और आगे भेजने में मदद करता है।
साथ में क्या लगाएं
- अपना कोई पहचान पत्र (आधार, वोटर ID)
- चोट की फोटो और सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट
- धमकी भरे मैसेज, कॉल रिकॉर्डिंग, दहेज मांग के सबूत (स्क्रीनशॉट/पेन ड्राइव)
- शादी का सबूत (फोटो, कार्ड, प्रमाण पत्र), बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, स्त्रीधन/सामान की सूची
कैसे और कहां जमा करें
- जान का खतरा हो तो पहले 112 या 181 पर कॉल करें; ज़रूरत हो तो नज़दीकी वन स्टॉप सेंटर (सखी) में तुरंत रहने, इलाज और काउंसलिंग की मदद मिलती है।
- यह पत्र ज़िले के संरक्षण अधिकारी को दें; वे DIR बनाकर मजिस्ट्रेट को भेजेंगे। चाहें तो वकील या DLSA की मदद से सीधे मजिस्ट्रेट के पास धारा 12 का आवेदन दे सकती हैं।
- मारपीट, दहेज उत्पीड़न जैसी बातों पर थाने/महिला थाने में भी लिखित शिकायत दें और FIR/रिसीविंग की कॉपी लें।
- मजिस्ट्रेट तुरंत (एक-पक्षीय) अंतरिम आदेश भी दे सकते हैं (धारा 23)। संरक्षण आदेश तोड़ा जाए तो वह अपराध है (धारा 31); पुलिस को बताएं।
ध्यान दें
- ज़रूरी कागज़ों (आधार, बैंक पासबुक, बच्चों के कागज़) की फोटो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या फोन के सुरक्षित फोल्डर में रखें।
- घटनाओं की तारीखें एक डायरी में लिखती रहें।
- मुफ्त वकील के लिए ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) या NALSA हेल्पलाइन 15100 पर संपर्क करें; महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता का हक है।
- यह कानून पत्नी के अलावा मां, बहन, बेटी, लिव-इन पार्टनर या घर में साथ रही किसी भी महिला पर लागू होता है।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
पुलिस को आवेदन: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
घरेलू हिंसा की शिकायत कहां करें?
ज़िले के संरक्षण अधिकारी, थाना/महिला थाना, या सीधे मजिस्ट्रेट के पास। तुरंत मदद के लिए 181 (महिला हेल्पलाइन) या 112 पर कॉल करें; वन स्टॉप सेंटर (सखी) भी मदद करता है।
संरक्षण अधिकारी क्या करते हैं?
वे शिकायत सुनकर घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) बनाते हैं, उसे मजिस्ट्रेट और पुलिस को भेजते हैं, और इलाज, आश्रय व मुफ्त कानूनी सहायता दिलाने में मदद करते हैं।
घरेलू हिंसा कानून में क्या-क्या आदेश मिल सकते हैं?
संरक्षण आदेश (धारा 18), साझा घर में रहने का आदेश (धारा 19), खर्च/भरण-पोषण (धारा 20), बच्चों की कस्टडी (धारा 21) और मुआवज़ा (धारा 22)। ज़रूरत हो तो अंतरिम आदेश भी (धारा 23)।
घरेलू हिंसा केस में कितना समय लगता है?
कानून कहता है कि पहली सुनवाई आम तौर पर आवेदन मिलने के 3 दिन के अंदर हो और मामला पहली सुनवाई से 60 दिन में निपटाने की कोशिश हो। असल में समय अदालत पर निर्भर करता है।
498A अब किस धारा में है?
1 जुलाई 2024 से पति या ससुराल वालों की क्रूरता का अपराध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 में है और क्रूरता की परिभाषा धारा 86 में।
दूसरे आवेदन पत्र
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