पड़ोसी द्वारा परेशान करने की शिकायत: थाने में आवेदन पत्र 2026
सीधा जवाब
पड़ोसी बार-बार गाली-गलौज, धमकी, मारपीट, रास्ता रोकने, कूड़ा/पानी फेंकने या तोड़फोड़ से परेशान करे, तो अपने इलाके के थाना प्रभारी (SHO) को लिखित शिकायत दें। मामला संज्ञेय अपराध का हो (जैसे गंभीर चोट) तो FIR (BNSS धारा 173) दर्ज होती है; छोटे झगड़े-गाली के ज़्यादातर मामले असंज्ञेय होते हैं, जिनमें पुलिस NCR (धारा 174) लिखकर मजिस्ट्रेट के पास भेजती है। लगातार शांति भंग का डर हो तो पुलिस धारा 126 के तहत SDM (कार्यपालक मजिस्ट्रेट) से पाबंद करवा सकती है।
- किसे दें
- थाना प्रभारी (SHO), स्थानीय थाना
- संज्ञेय मामला
- FIR, BNSS धारा 173; कॉपी मुफ्त
- असंज्ञेय मामला
- NCR, BNSS धारा 174; आगे मजिस्ट्रेट के आदेश से जांच
- तुरंत खतरा
- 112 पर कॉल करें
यह पत्र कानूनी सलाह नहीं है। गंभीर मामलों में ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से मुफ्त कानूनी सलाह लें (NALSA हेल्पलाइन 15100)।
अपना पड़ोसी की थाने में शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- पड़ोसी बार-बार गाली देता है, धमकाता है या झगड़ा करता है
- घर के सामने रास्ता रोकना, गाड़ी/सामान रखकर आने-जाने में रुकावट
- कूड़ा, गंदा पानी फेंकना या घर/गाड़ी को नुकसान पहुंचाना
- महिलाओं/बुज़ुर्गों को डराना, घूरना या परेशान करना
किसे लिखें: जिस थाना क्षेत्र में आप रहते हैं, उसके थाना प्रभारी / SHO को। कार्रवाई न हो तो कॉपी क्षेत्राधिकारी (CO/ACP) या पुलिस अधीक्षक को भेजें।
साथ में क्या लगाएं
- घटनाओं की फोटो, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग (पेन ड्राइव या प्रिंट)
- चोट लगी हो तो सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट (MLC)
- नुकसान का सबूत: टूटे सामान की फोटो, मरम्मत का बिल
- गवाहों के नाम-पते और पहले दी गई शिकायतों की कॉपी
कैसे और कहां जमा करें
- तुरंत झगड़ा या मारपीट हो रही हो तो पहले 112 पर कॉल करें।
- पत्र की दो कॉपी लेकर थाने जाएं, एक जमा करें और दूसरी पर मुहर/तारीख वाली रिसीविंग लें; FIR या NCR हो तो उसकी कॉपी/नंबर लें।
- कई राज्यों के पुलिस सिटिजन पोर्टल/ऐप पर भी ऑनलाइन शिकायत होती है; उसकी शिकायत संख्या संभालें।
- थाना कार्रवाई न करे तो क्षेत्राधिकारी/SP को लिखें; संज्ञेय मामले में FIR न लिखी जाए तो SP को BNSS 173(4) में डाक से शिकायत का रास्ता है। NCR मामले में आप सीधे मजिस्ट्रेट के पास शिकायत कर सकते हैं।
ध्यान दें
- घटनाएं तारीख-समय के साथ एक डायरी में लिखते रहें; यही बाद में सबसे बड़ा सबूत बनता है।
- बदले में गाली या मारपीट न करें, वरना क्रॉस शिकायत में आप भी फंस सकते हैं।
- ज़मीन/दीवार/रास्ते की सीमा का विवाद हो तो वह तहसील या सिविल अदालत का मामला भी है; पैमाइश करवाएं।
- तेज़ आवाज़ (DJ/लाउडस्पीकर) की परेशानी के लिए हमारा अलग ध्वनि प्रदूषण शिकायत पत्र देखें।
- झूठी या बढ़ा-चढ़ाकर लिखी शिकायत खुद आपके खिलाफ जा सकती है।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
पुलिस को आवेदन: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पड़ोसी परेशान करे तो क्या करें?
घटनाएं तारीख के साथ लिखें, सबूत रखें और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दें। तुरंत खतरा हो तो 112 पर कॉल करें।
पुलिस NCR क्यों लिखती है, FIR क्यों नहीं?
गाली-गलौज, मामूली मारपीट जैसे कई अपराध असंज्ञेय होते हैं। ऐसे मामलों में BNSS धारा 174 के तहत पुलिस NCR दर्ज करती है और मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना जांच नहीं कर सकती। गंभीर चोट, तोड़फोड़ में बड़ा नुकसान जैसे संज्ञेय मामलों में FIR होती है।
धारा 126 BNSS क्या है?
पुरानी CrPC 107 की जगह आई यह धारा कार्यपालक मजिस्ट्रेट (आम तौर पर SDM) को अधिकार देती है कि शांति भंग की आशंका वाले व्यक्ति से एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाए। पुलिस इसकी रिपोर्ट भेजती है।
थाना शिकायत न ले तो?
क्षेत्राधिकारी/पुलिस अधीक्षक को लिखें। संज्ञेय अपराध में FIR न लिखे जाने पर BNSS धारा 173(4) के तहत SP को डाक से शिकायत भेजें, फिर मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं।
दूसरे आवेदन पत्र
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