ज़मीन की नापजोख / सीमांकन (Demarcation) का आवेदन पत्र 2026
सीधा जवाब
अपनी ज़मीन की सही सीमा जानने, मेड़/मुंडेर का झगड़ा सुलझाने या कब्ज़ा साबित करने के लिए तहसीलदार को सीमांकन (नापजोख/पैमाइश) का आवेदन दिया जाता है। राजस्व निरीक्षक/लेखपाल/सर्वेयर नक्शे के आधार पर मौके पर नाप करते हैं, पड़ोसी खातेदारों को सूचना दी जाती है और सीमा के निशान लगाए जाते हैं। उदाहरण: मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 129 में तहसीलदार सीमांकन कराते हैं और उसके खिलाफ SDO को आवेदन होता है। फीस और प्रक्रिया राज्य के नियम से तय है।
- किसे दें
- तहसीलदार (राजस्व विभाग)
- कौन नापेगा
- राजस्व निरीक्षक / लेखपाल / पटवारी / सर्वेयर
- पड़ोसी
- सीमा से लगे खातेदारों को सूचना
- असहमति
- रिपोर्ट पर आपत्ति; राज्य कानून में तय अपील (जैसे MP: SDO)
सीमांकन की धारा, फीस, समय और अपील का रास्ता हर राज्य के भू-राजस्व कानून में अलग है। धारा 129 वाला उदाहरण मध्य प्रदेश का है।
अपना ज़मीन सीमांकन आवेदन बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- पड़ोसी से मेड़/सीमा को लेकर झगड़ा है
- प्लॉट/खेत पर कब्ज़े की शिकायत करनी है और सीमा साबित करनी है
- ज़मीन बेचने, खरीदने, बाउंड्री बनाने या मकान बनाने से पहले
- चकबंदी या बंटवारे के बाद मौके पर हिस्सा तय करना है
किसे लिखें: जिस तहसील में ज़मीन है, वहां के तहसीलदार को (कुछ राज्यों में अंचल अधिकारी, सर्किल ऑफिसर या भू-अभिलेख अधिकारी)। कई राज्यों में सीमांकन का आवेदन राजस्व पोर्टल पर ऑनलाइन भी होता है।
साथ में क्या लगाएं
- ताज़ा खसरा-खतौनी/B-1/7-12/RTC की नकल
- गांव का नक्शा (भू-नक्शा/शजरा/टिप्पण) जिसमें आपका खसरा दिखे
- बैनामा/रजिस्ट्री, बंटवारे या चकबंदी के कागज़
- सीमांकन शुल्क की रसीद (राज्य के नियम से)
कैसे और कहां जमा करें
- राज्य के राजस्व पोर्टल पर ऑनलाइन सीमांकन आवेदन है या नहीं, देखें; नहीं तो तहसील में पत्र और शुल्क जमा करें और रसीद/प्रकरण संख्या लें।
- तहसीलदार राजस्व निरीक्षक/लेखपाल को सीमांकन के लिए भेजते हैं; तारीख की सूचना आपको और पड़ोसियों को मिलती है।
- तय दिन मौके पर मौजूद रहें, गवाह साथ रखें; नाप के बाद पंचनामा पर हस्ताक्षर करें और रिपोर्ट की कॉपी लें।
- रिपोर्ट से असहमत हों तो उसी प्रकरण में लिखित आपत्ति दें; अंतिम आदेश के खिलाफ राज्य कानून में तय अधिकारी (जैसे MP में SDO) को आवेदन/अपील करें।
- देरी हो तो जनसुनवाई/CM हेल्पलाइन या ज़िला कलेक्टर को शिकायत करें।
ध्यान दें
- सीमांकन नक्शे और रिकॉर्ड के आधार पर होता है; पहले अपनी खतौनी और नक्शा सही करवा लें।
- पड़ोसियों के नाम-पते सही लिखें, ताकि नोटिस न लौटे और बाद में आपत्ति न हो।
- सीमांकन के बाद पक्के निशान (पत्थर/मुंडेर) लगवाएं और रिपोर्ट संभालें।
- सीमांकन से मालिकाना हक तय नहीं होता; हक का विवाद हो तो अदालत जाना होगा।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
ज़मीन, तहसील और किसान: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ज़मीन की नापजोख के लिए आवेदन किसे दें?
जिस तहसील में ज़मीन है, वहां के तहसीलदार को। कई राज्यों में राजस्व पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भी होता है।
सीमांकन की फीस कितनी है?
राज्य के नियम से तय होती है और ज़मीन के क्षेत्र/प्रकार पर अलग हो सकती है। तहसील से पूछकर सरकारी रसीद पर ही जमा करें।
क्या सीमांकन के समय पड़ोसियों को बुलाया जाता है?
हां, सीमा से लगे खातेदारों को सूचना दी जाती है ताकि वे मौके पर आकर अपनी बात रख सकें।
सीमांकन रिपोर्ट से सहमत न हों तो?
उसी प्रकरण में लिखित आपत्ति दें। अंतिम आदेश पर राज्य कानून में अपील/पुनरीक्षण होता है, जैसे मध्य प्रदेश में धारा 129(5) में SDO को।
सीमांकन से कब्ज़ा हट जाता है?
सीमांकन सिर्फ सही सीमा बताता है। कब्ज़ा हटवाने के लिए रिपोर्ट के साथ तहसीलदार/SDM, पुलिस या अदालत में अलग कार्रवाई करनी होती है।
दूसरे आवेदन पत्र
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