खसरा-खतौनी / भू-अभिलेख में नाम या रकबा सुधार का आवेदन पत्र 2026
सीधा जवाब
खतौनी, जमाबंदी, 7/12, RTC या पट्टा जैसे भू-अभिलेख में नाम की स्पेलिंग, पिता का नाम, हिस्सा या रकबा (क्षेत्रफल) गलत दर्ज हो तो अपनी तहसील के तहसीलदार को सुधार का आवेदन दिया जाता है। राजस्व निरीक्षक/लेखपाल जांच करते हैं और सक्षम अधिकारी आदेश देता है। उदाहरण: उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 38 में आवेदन तहसीलदार को जाता है, आदेश SDM देते हैं और 30 दिन में कमिश्नर को अपील होती है। सुधार की यह प्रक्रिया मालिकाना हक का विवाद तय नहीं करती।
- किसे दें
- तहसीलदार (राजस्व विभाग)
- जांच
- लेखपाल/पटवारी/राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट
- कानून
- राज्य का भू-राजस्व कानून (जैसे UP: धारा 38)
- हक का विवाद
- राजस्व/सिविल कोर्ट में अलग मुकदमा
हर राज्य का भू-राजस्व कानून, धारा, फॉर्म और अपील का रास्ता अलग है। ऊपर दिया धारा 38 का उदाहरण उत्तर प्रदेश का है; अपने राज्य में तहसील से पूछें।
अपना खतौनी सुधार आवेदन बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- खतौनी में आपके या पिता के नाम की स्पेलिंग गलत है, या आधार से मेल नहीं खाती
- रकबा/हिस्सा कम या ज़्यादा दर्ज हो गया है
- गाटा/खसरा नंबर या फसल/भूमि प्रकार गलत लिखा है
- PM किसान, फार्मर ID, KCC या बैंक लोन में नाम मेल न खाने से काम अटका है
किसे लिखें: जिस तहसील में ज़मीन है, वहां के तहसीलदार को (कुछ राज्यों में अंचल अधिकारी, मामलतदार या राजस्व अधिकारी)। कई राज्यों में यह आवेदन भू-अभिलेख पोर्टल या e-District से ऑनलाइन भी होता है।
साथ में क्या लगाएं
- वर्तमान खतौनी/जमाबंदी/7-12/RTC की नकल (ऑनलाइन निकाली हुई भी)
- ज़मीन का मूल कागज़: बैनामा/रजिस्ट्री, विरासत/नामांतरण आदेश, पुरानी खतौनी जिसमें सही दर्ज था
- नाम सुधार के लिए आधार, वोटर ID, स्कूल रिकॉर्ड
- रकबा सुधार के लिए नक्शा/पैमाइश रिपोर्ट, चकबंदी के कागज़
कैसे और कहां जमा करें
- अपने राज्य के भू-अभिलेख पोर्टल पर देखें कि सुधार का ऑनलाइन आवेदन है या नहीं; नहीं तो तहसील के जन सुविधा केंद्र/तहसीलदार कार्यालय में पत्र जमा करें और रसीद/वाद संख्या लें।
- लेखपाल/पटवारी और राजस्व निरीक्षक मौके और रिकॉर्ड की जांच करते हैं; पड़ोसी खातेदारों को नोटिस जा सकता है।
- सक्षम अधिकारी (तहसीलदार/SDM) के आदेश के बाद नई खतौनी में सुधार दिखेगा; नकल निकालकर जांचें।
- आदेश से असहमत हों तो राज्य कानून में तय समय में अपील करें (UP में धारा 38 के आदेश पर 30 दिन में कमिश्नर); देरी हो तो जनसुनवाई/CM हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
ध्यान दें
- सिर्फ लिपिकीय गलती ही इस आवेदन से सुधरती है; मालिकाना हक या हिस्से का विवाद हो तो राजस्व न्यायालय/सिविल कोर्ट में मुकदमा करना होता है।
- नाम बिल्कुल आधार जैसा लिखवाएं, ताकि PM किसान, फार्मर ID और बैंक में दिक्कत न हो।
- रकबा सुधार के लिए अक्सर पहले पैमाइश (नापजोख) करानी पड़ती है।
- लेखपाल या किसी को रिश्वत न दें; मांगे तो भ्रष्टाचार की शिकायत करें।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
ज़मीन, तहसील और किसान: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खतौनी में नाम सुधार कैसे कराएं?
तहसीलदार को आवेदन दें, साथ में खतौनी की नकल, बैनामा/नामांतरण आदेश और आधार लगाएं। लेखपाल की जांच के बाद सक्षम अधिकारी सुधार का आदेश देता है।
खतौनी सुधार का आवेदन किसे दें?
जिस तहसील में ज़मीन है, वहां के तहसीलदार को। कुछ राज्यों में भू-अभिलेख पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भी होता है।
UP में खतौनी सुधार किस धारा में होता है?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 38 में। आवेदन तहसीलदार को, आदेश SDM (नक्शे के मामले में कलेक्टर) देते हैं और 30 दिन में कमिश्नर को अपील होती है।
रकबा गलत दर्ज हो तो क्या करें?
तहसीलदार को सुधार का आवेदन दें; अक्सर पहले पैमाइश/सीमांकन होता है। हिस्से का विवाद हो तो राजस्व न्यायालय में बंटवारे/घोषणा का मुकदमा करना पड़ता है।
खतौनी सुधार में कितना समय लगता है?
राज्य और मामले पर निर्भर है; कोई एक राष्ट्रीय समय सीमा नहीं है। रसीद/वाद संख्या से स्थिति पूछते रहें।
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