पीएम प्रणाम योजना (PM-PRANAM): राज्यों को खाद की बचत पर अनुदान, किसानों के लिए इसका मतलब
सीधा जवाब
पीएम प्रणाम (PM-PRANAM) केंद्र सरकार की वह योजना है जिसमें जो राज्य रासायनिक खाद का उपयोग घटाता है, उसे बची हुई खाद सब्सिडी का 50% अनुदान के रूप में मिलता है। यह पैसा राज्य सरकार को मिलता है, किसान के खाते में सीधे नहीं आता। इसलिए किसान को इस योजना के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरना होता; जो वेबसाइट या व्यक्ति "PM-PRANAM आवेदन" के नाम पर फीस मांगे, उससे सावधान रहें।
- पूरा नाम
- Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth
- किसे पैसा
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार (किसान को सीधे नहीं)
- अनुदान
- बची हुई रासायनिक खाद सब्सिडी का 50%
- किसान का आवेदन
- कोई अलग आवेदन नहीं
🏪 पीएम प्रणाम योजना फॉर्म खुद न भर पाएं तो नज़दीकी CSC (जन सेवा केंद्र) पर भरवाएं: CSC सेंटर देखें
योजना क्या है
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 जून 2023 को इस योजना को मंज़ूरी दी। इसका मकसद रासायनिक खाद (यूरिया, DAP आदि) का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल घटाना और जैविक/प्राकृतिक खेती, नैनो खाद और दूसरी वैकल्पिक खादों को बढ़ावा देना है, ताकि मिट्टी की सेहत सुधरे।
- हर राज्य की रासायनिक खाद की खपत की तुलना उसके पिछले 3 साल के औसत से होती है।
- खपत घटने से केंद्र की जितनी सब्सिडी बचती है, उसका 50% उस राज्य को अनुदान के रूप में दिया जाता है।
- योजना का कोई अलग बजट नहीं है; पैसा खाद सब्सिडी की बचत से आता है। खाद का हिसाब उर्वरक विभाग के iFMS सिस्टम से रखा जाता है।
राज्य अनुदान का पैसा कहां खर्च करते हैं
| हिस्सा | किस पर खर्च |
|---|---|
| 70% | वैकल्पिक खाद बनाने और उससे जुड़ी संपत्ति (जैसे जैविक खाद इकाइयां) गांव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर |
| 30% | खाद की खपत घटाने और जागरूकता फैलाने वाले किसानों, पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन |
किसानों या पंचायतों को प्रोत्साहन कैसे और किसे मिलेगा, यह राज्य सरकार तय करती है। अपने ज़िला कृषि अधिकारी से पूछें कि आपके राज्य में ऐसा कोई कार्यक्रम चल रहा है या नहीं।
किसान के लिए इसका क्या मतलब है
- कोई सीधा पैसा या फॉर्म नहीं: PM-PRANAM के नाम से किसान के लिए कोई राष्ट्रीय पंजीकरण पोर्टल नहीं है।
- मिट्टी जांच के हिसाब से खाद डालें: ज़रूरत से ज़्यादा यूरिया डालने से खर्च बढ़ता है और मिट्टी खराब होती है।
- वैकल्पिक खाद: जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरक और नैनो यूरिया/नैनो DAP के बारे में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से सलाह लें।
- राज्य अपने अनुदान से किसानों के लिए प्रशिक्षण या प्रोत्साहन कार्यक्रम चला सकते हैं; इनकी जानकारी कृषि विभाग से मिलेगी।
"PM-PRANAM योजना में रजिस्ट्रेशन करो, सब्सिडी मिलेगी" कहकर फीस या OTP मांगने वाले लोग ठग हो सकते हैं। ठगी होने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
योजना की अवधि
- योजना वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 (तीन साल) के लिए मंज़ूर हुई थी।
- 15 अक्टूबर 2026 तक इसकी आगे की अवधि की कोई आधिकारिक घोषणा हमें नहीं मिली। ताज़ा जानकारी उर्वरक विभाग या PIB पर देखें।
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 15 अक्टूबर 2026
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SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, किसी सरकारी विभाग से जुड़ी नहीं। ऊपर की राशि हमारी सेवा का शुल्क है, कोई सरकारी फीस नहीं; यही जानकारी official पोर्टल पर फ्री भी मिलती है। रिफंड और सेवा शर्तें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पीएम प्रणाम योजना में किसान को पैसा मिलता है?
सीधे नहीं। अनुदान राज्य सरकार को मिलता है। उसका 30% हिस्सा राज्य खाद की खपत घटाने वाले किसानों, पंचायतों, FPO और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन देने में खर्च कर सकता है।
पीएम प्रणाम योजना का ऑनलाइन आवेदन कहां होता है?
किसानों के लिए इस योजना में कोई अलग ऑनलाइन आवेदन नहीं है। यह केंद्र और राज्यों के बीच की योजना है।
राज्य को कितना अनुदान मिलता है?
राज्य की रासायनिक खाद की खपत पिछले 3 साल के औसत से जितनी घटती है, उससे बची केंद्रीय सब्सिडी का 50%।
PM-PRANAM का पूरा नाम क्या है?
PM Programme for Restoration, Awareness, Nourishment and Amelioration of Mother Earth, यानी धरती माता के पुनर्स्थापन, जागरूकता, पोषण और सुधार का कार्यक्रम।
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