ग्रेच्युटी कैलकुलेटर 2026: नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर कितनी ग्रेच्युटी

सीधा जवाब

प्राइवेट नौकरी में ग्रेच्युटी = आखिरी बेसिक + DA × 15 × सेवा के साल ÷ 26, अधिकतम ₹20 लाख। स्थायी कर्मचारी को 5 साल और फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी को (21 नवंबर 2025 से) 1 साल की सेवा पर ग्रेच्युटी मिलती है। नीचे अपना वेतन और सेवा डालें, टूल हिसाब कर देगा।

🧮 ग्रेच्युटी कैलकुलेटर

कैसे इस्तेमाल करें

  1. कर्मचारी का प्रकार चुनें। ज़्यादातर प्राइवेट कंपनियों (10 या ज़्यादा कर्मचारी) पर ग्रेच्युटी कानून लागू होता है।
  2. सैलरी स्लिप से आखिरी महीने का बेसिक + DA डालें। ग्रॉस वेतन भी डालेंगे तो टूल नए लेबर कोड का 50% नियम लगा देगा।
  3. कुल सेवा साल और महीनों में डालें, फिर बटन दबाएं।

नियम और फॉर्मूला

कर्मचारीफॉर्मूलान्यूनतम सेवा · सीमा
स्थायी (कानून लागू)वेतन × 15 × साल ÷ 265 साल · ₹20 लाख
फिक्स्ड-टर्मवेतन × 15 × सेवा (अनुपात में) ÷ 261 साल · ₹20 लाख
केंद्र सरकारवेतन × ¼ × पूरी छमाहियां (अधिकतम 16.5 × वेतन)5 साल · ₹25 लाख
कानून लागू नहींवेतन × 15 × पूरे साल ÷ 30कंपनी की नीति
  • वेतन: बेसिक + महंगाई भत्ता (DA)। नए लेबर कोड में अगर बाकी भत्ते कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हों, तो ज़्यादा हिस्सा वेतन में जुड़ता है।
  • 26 क्यों: महीने में 26 काम के दिन माने जाते हैं, और हर साल के 15 दिन का वेतन मिलता है।
  • भुगतान: कंपनी को ग्रेच्युटी देय होने के 30 दिन के अंदर देनी होती है; देर होने पर ब्याज लगता है।

ध्यान दें

  • यह अनुमान है। असल राशि कंपनी के रिकॉर्ड, वेतन की परिभाषा और नियमों से तय होती है।
  • नए लेबर कोड के 50% वेतन नियम और फिक्स्ड-टर्म नियम का ब्योरा हमने सरकारी प्रेस नोट और कानूनी विश्लेषणों से लिया है; अपने मामले में HR से पुष्टि करें।
  • टैक्स छूट की सीमा नए आयकर कानून, 2025 में हमने जांची नहीं है; टैक्स के लिए नियोक्ता या टैक्स सलाहकार से पूछें।
  • ग्रेच्युटी न मिले तो पहले कंपनी को लिखित आवेदन दें, फिर अपने क्षेत्र के श्रम विभाग (नियंत्रक प्राधिकारी) से शिकायत करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ग्रेच्युटी का फॉर्मूला क्या है?

प्राइवेट नौकरी में: आखिरी महीने का वेतन (बेसिक + DA) × 15 × सेवा के साल ÷ 26। जैसे ₹50,000 वेतन और 10 साल सेवा पर: 50,000 × 15 × 10 ÷ 26 = ₹2,88,462। अधिकतम राशि ₹20 लाख है।

ग्रेच्युटी के लिए कितने साल की नौकरी ज़रूरी है?

स्थायी कर्मचारी के लिए आम तौर पर 5 साल की लगातार सेवा। 21 नवंबर 2025 से लागू नए लेबर कोड में फिक्स्ड-टर्म (तय अवधि के अनुबंध वाले) कर्मचारी को 1 साल की सेवा पर ही ग्रेच्युटी मिलती है। मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में न्यूनतम सेवा की शर्त नहीं है।

6 महीने से ज़्यादा की सेवा का क्या होता है?

आखिरी साल में 6 महीने से ज़्यादा काम किया हो तो उसे पूरा साल गिना जाता है। जैसे 10 साल 7 महीने = 11 साल। 6 महीने या कम हो तो वह साल नहीं जुड़ता।

नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी पर क्या असर पड़ा?

वेतन की नई परिभाषा के अनुसार अगर HRA, भत्ते जैसे हिस्से कुल वेतन के 50% से ज़्यादा हैं, तो ज़्यादा वाला हिस्सा वेतन में जोड़ा जाता है। यानी ग्रेच्युटी कम से कम कुल वेतन के आधे पर बनती है। साथ ही फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को 1 साल पर ग्रेच्युटी मिलती है।

क्या ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है?

सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री है। प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पुराने आयकर कानून में ₹20 लाख तक छूट थी। 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून, 2025 लागू है; उसमें यही सीमा है या नहीं, इसकी पुष्टि हम नहीं कर पाए, इसलिए अपने नियोक्ता या टैक्स सलाहकार से पूछें।

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