इनकम टैक्स कैलकुलेटर 2026-27: पुरानी बनाम नई व्यवस्था

सीधा जवाब

टैक्स वर्ष 2026-27 (1 अप्रैल 2026 से, नया आयकर कानून 2025) में दरें 2025-26 जैसी ही हैं। नई व्यवस्था में ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य है, यानी ₹12.75 लाख तक की सैलरी टैक्स-फ्री। नीचे अपनी आय और कटौतियां डालें; टूल दोनों व्यवस्थाओं का टैक्स (सरचार्ज और 4% सेस सहित) दिखाकर बताएगा कि कौन-सी सस्ती है।

🧮 टैक्स कैलकुलेटर (टैक्स वर्ष 2026-27 / वित्त वर्ष 2025-26)

पुरानी व्यवस्था की कटौतियां (सिर्फ पुरानी में)

कैसे इस्तेमाल करें

  1. साल भर की कुल सैलरी/पेंशन (Form 16 का ग्रॉस) और दूसरी आय डालें।
  2. पुरानी व्यवस्था देखनी हो तो उसकी कटौतियां भरें। नई व्यवस्था में ये नहीं मिलतीं।
  3. नतीजा तुरंत दिखता है: दोनों व्यवस्थाओं का टैक्स, हर हिस्से का ब्योरा और कौन-सी सस्ती है।

टैक्स स्लैब 2026-27

नई व्यवस्था (डिफॉल्ट)दर
₹4 लाख तक0
₹4-8 लाख5%
₹8-12 लाख10%
₹12-16 लाख15%
₹16-20 लाख20%
₹20-24 लाख25%
₹24 लाख से ऊपर30%
पुरानी व्यवस्था60 से कम60-7980+
0%₹2.5 लाख तक₹3 लाख तक₹5 लाख तक
5%₹2.5-5 लाख₹3-5 लाख-
20%₹5-10 लाख
30%₹10 लाख से ऊपर
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: नई में ₹75,000, पुरानी में ₹50,000 (सैलरी और पेंशन वालों को)।
  • रिबेट: नई में ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 तक (₹12 लाख से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ); पुरानी में ₹5 लाख तक ₹12,500 तक।
  • सरचार्ज: ₹50 लाख से ऊपर 10%, ₹1 करोड़ से ऊपर 15%, ₹2 करोड़ से ऊपर 25%, ₹5 करोड़ से ऊपर 37% (सिर्फ पुरानी; नई में अधिकतम 25%)। फिर कुल पर 4% सेस।

ध्यान दें

  • यह अनुमान है। शेयर/म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन, लॉटरी जैसी विशेष दर वाली आय, खेती की आय और नुकसान की भरपाई इसमें नहीं गिने गए।
  • सरचार्ज की दरें बजट 2026 में न बदलने की खबरों पर आधारित हैं; बहुत ज़्यादा आय हो तो CA से पुष्टि करें।
  • कंपनी के NPS योगदान की सीमा (नई में बेसिक का 14%, पुरानी में 10%) टूल नहीं जांचता; सही रकम डालें।
  • रिटर्न सिर्फ incometax.gov.in पर भरें। SarkariSewa India निजी वेबसाइट है। ITR भरने की गाइड देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026-27 में नई टैक्स व्यवस्था के स्लैब क्या हैं?

₹4 लाख तक 0, ₹4-8 लाख 5%, ₹8-12 लाख 10%, ₹12-16 लाख 15%, ₹16-20 लाख 20%, ₹20-24 लाख 25% और ₹24 लाख से ऊपर 30%। बजट 2026 में इन्हें नहीं बदला गया, इसलिए 2025-26 और 2026-27 दोनों में यही दरें हैं। ऊपर से 4% सेस लगता है।

₹12.75 लाख तक की सैलरी पर टैक्स ज़ीरो कैसे है?

नई व्यवस्था में ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद टैक्स वाली आय ₹12 लाख बचती है, और ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 तक की छूट (रिबेट) मिलती है, जिससे टैक्स शून्य हो जाता है। यह छूट कैपिटल गेन जैसी विशेष दर वाली आय पर नहीं मिलती।

₹12 लाख से थोड़ा ज़्यादा आय हो तो?

मार्जिनल रिलीफ मिलती है: टैक्स, ₹12 लाख से ऊपर की आय से ज़्यादा नहीं होगा। जैसे टैक्स वाली आय ₹12.25 लाख हो तो टैक्स ₹25,000 + सेस, न कि पूरे स्लैब वाला ₹63,750।

पुरानी या नई, कौन-सी व्यवस्था चुनें?

अगर आपकी 80C, HRA, होम लोन ब्याज, 80D जैसी कटौतियां बहुत ज़्यादा हैं तो पुरानी व्यवस्था सस्ती हो सकती है; वरना ज़्यादातर लोगों के लिए नई व्यवस्था सस्ती है। यह टूल दोनों का टैक्स साथ दिखाता है। नई व्यवस्था डिफॉल्ट है; पुरानी चाहिए तो रिटर्न/कंपनी को बताना होता है।

नए आयकर कानून, 2025 में क्या बदला?

1 अप्रैल 2026 से आयकर कानून, 1961 की जगह आयकर कानून, 2025 लागू है। 'पिछला वर्ष/निर्धारण वर्ष' की जगह 'टैक्स वर्ष' शब्द आया और धाराओं के नंबर बदले (जैसे 80C अब धारा 123, रिबेट 87A अब धारा 156)। टैक्स की दरें और मुख्य कटौतियों की सीमाएं वही रहीं।

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