संपत्ति कर नामांतरण (म्यूटेशन) आवेदन पत्र 2026
सीधा जवाब
मकान/प्लॉट खरीदने, विरासत में मिलने या दान से मिलने पर नगर निगम/नगर पालिका के संपत्ति कर (हाउस टैक्स) रिकॉर्ड में नया नाम दर्ज करवाने को नामांतरण या म्यूटेशन कहते हैं। आवेदन नगर निकाय के कर निर्धारण अधिकारी / राजस्व विभाग को दिया जाता है। शुल्क, आपत्ति के लिए नोटिस और समय सीमा हर राज्य के नगर पालिका कानून और शहर के नियम से तय होते हैं। ध्यान रखें: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार म्यूटेशन सिर्फ टैक्स के रिकॉर्ड के लिए है, इससे मालिकाना हक नहीं मिलता।
- किसे दें
- नगर निगम/नगर पालिका का कर निर्धारण अधिकारी / राजस्व (हाउस टैक्स) विभाग
- ज़रूरी कागज़
- रजिस्ट्री / वसीयत / वारिस प्रमाण, मृत्यु प्रमाण पत्र (विरासत में), पहचान पत्र, ताज़ा टैक्स रसीद
- फीस और समय
- राज्य और शहर के नियम के हिसाब से अलग; दफ्तर या पोर्टल से पूछें
- ध्यान दें
- म्यूटेशन टैक्स रिकॉर्ड के लिए है; मालिकाना हक रजिस्ट्री/उत्तराधिकार से तय होता है
नामांतरण का शुल्क, फॉर्म और प्रक्रिया हर राज्य के नगर पालिका कानून और शहर के नियम से अलग है। कई शहर सिर्फ ऑनलाइन या अपने तय फॉर्म पर ही आवेदन लेते हैं।
अपना हाउस टैक्स नामांतरण आवेदन बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- मकान/फ्लैट/प्लॉट खरीदा है और हाउस टैक्स अब भी पुराने मालिक के नाम है
- माता-पिता या परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद संपत्ति वारिसों के नाम करनी है
- वसीयत, दान पत्र (गिफ्ट डीड) या बंटवारे से संपत्ति मिली है
- बिजली/पानी कनेक्शन या लोन के लिए अपने नाम की टैक्स रसीद चाहिए
किसे लिखें: शहर के नगर निगम / नगर पालिका / नगर पंचायत के कर निर्धारण अधिकारी (Assessing Officer), ज़ोनल अधिकारी या राजस्व अधीक्षक को। गांव की खेती की ज़मीन का दाखिल-खारिज/नामांतरण तहसील (राजस्व विभाग) में होता है, नगर निकाय में नहीं।
साथ में क्या लगाएं
- खरीद पर: रजिस्टर्ड बैनामा/सेल डीड की प्रमाणित कॉपी
- विरासत पर: मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस/उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या बाकी वारिसों का अनापत्ति शपथ पत्र; वसीयत हो तो उसकी कॉपी
- ताज़ा संपत्ति कर रसीद (बकाया न हो)
- आवेदक का पहचान प्रमाण और फोटो; कई शहर नोटरी शपथ पत्र भी मांगते हैं
कैसे और कहां जमा करें
- अपने नगर निगम/नगर पालिका की वेबसाइट देखें; कई शहरों में म्यूटेशन ऑनलाइन या नागरिक सुविधा केंद्र से होता है।
- ऑफलाइन हो तो यह पत्र, फॉर्म और दस्तावेज़ ज़ोनल/राजस्व कार्यालय में जमा करें और पावती लें।
- कई जगह आपत्तियों के लिए सार्वजनिक नोटिस निकाला जाता है; आपत्ति न आने पर आदेश होता है। तय शुल्क रसीद लेकर ही जमा करें।
- लंबे समय तक आदेश न हो तो नगर आयुक्त/EO को लिखें, राज्य के लोक शिकायत पोर्टल पर शिकायत करें, या RTI से आवेदन की स्थिति पूछें।
ध्यान दें
- पहले पुराना हाउस टैक्स बकाया चुका दें; बकाया रहने पर ज़्यादातर जगह नामांतरण रुकता है।
- विरासत में सभी वारिसों के नाम या बाकी वारिसों की लिखित सहमति लगाएं, वरना आपत्ति आ सकती है।
- हाउस टैक्स में नाम बदलने से मालिकाना हक साबित नहीं होता; रजिस्ट्री और उत्तराधिकार के कागज़ संभाल कर रखें।
- खेती की ज़मीन का नामांतरण (दाखिल-खारिज) तहसील में होता है, नगर निगम में नहीं।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
नगर पालिका और पंचायत: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हाउस टैक्स में नाम कैसे बदलवाएं?
नगर निगम/नगर पालिका के कर निर्धारण या राजस्व विभाग में (कई शहरों में ऑनलाइन) नामांतरण का आवेदन दें। साथ में बैनामा या वारिस के कागज़, ताज़ा टैक्स रसीद और पहचान पत्र लगाएं, फिर तय शुल्क जमा करें।
म्यूटेशन (नामांतरण) की फीस कितनी है?
यह हर राज्य और शहर के नियम से अलग है; कहीं तय राशि, कहीं संपत्ति के मूल्य का प्रतिशत। सही शुल्क नगर निकाय की वेबसाइट या दफ्तर से पूछें।
क्या म्यूटेशन से मालिकाना हक मिल जाता है?
नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि म्यूटेशन की एंट्री सिर्फ टैक्स वसूली के रिकॉर्ड के लिए है; मालिकाना हक रजिस्टर्ड दस्तावेज़, वसीयत या उत्तराधिकार से तय होता है।
पिता की मृत्यु के बाद मकान का हाउस टैक्स अपने नाम कैसे करें?
मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस प्रमाण पत्र या बाकी वारिसों का अनापत्ति शपथ पत्र और ताज़ा टैक्स रसीद के साथ नामांतरण का आवेदन दें। सभी वारिसों के नाम भी दर्ज कराए जा सकते हैं।
नगर निगम म्यूटेशन में कितना समय लगता है?
समय सीमा राज्य के लोक सेवा गारंटी कानून या शहर के नागरिक चार्टर में तय होती है। आपत्ति का नोटिस निकलने पर कुछ हफ्ते लग सकते हैं; अपने शहर की समय सीमा दफ्तर से पूछें।
दूसरे आवेदन पत्र
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