साइबर फ्रॉड शिकायत पत्र 2026: UPI/ऑनलाइन ठगी पर पुलिस को आवेदन
सीधा जवाब
UPI, बैंक या ऑनलाइन ठगी होते ही सबसे पहले 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, ताकि ठग के खाते में गया पैसा रोका जा सके। फिर बैंक को लिखित सूचना दें और यह पत्र नज़दीकी थाने/साइबर सेल में देकर FIR की मांग करें। नए कानून BNSS की धारा 173 के तहत FIR किसी भी थाने में (ज़ीरो FIR) और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी दर्ज हो सकती है।
- सबसे पहले
- 1930 पर कॉल (वित्तीय साइबर ठगी हेल्पलाइन)
- ऑनलाइन शिकायत
- cybercrime.gov.in
- बैंक को सूचना
- तुरंत; अनधिकृत लेनदेन 3 कामकाजी दिन में बताने पर (आपकी गलती न हो तो) ग्राहक की देनदारी शून्य (RBI 2017)
- कानून
- BNS धारा 318/319, IT Act धारा 66C/66D; FIR: BNSS धारा 173
ठगी के बाद पहले कुछ घंटे सबसे कीमती होते हैं। यह पत्र बनाने से पहले 1930 पर कॉल या cybercrime.gov.in पर शिकायत ज़रूर कर दें।
अपना साइबर फ्रॉड शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- UPI/QR स्कैन करवाकर या लिंक भेजकर पैसे निकाल लिए गए
- बैंक/KYC/बिजली बिल के नाम पर कॉल करके OTP लेकर पैसे कटे
- नौकरी, टास्क, निवेश या लोन के नाम पर पैसे ठग लिए
- आपके नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर पैसे मांगे गए
किसे लिखें: अपने इलाके के थाना प्रभारी (SHO) या ज़िले के साइबर सेल/साइबर थाना प्रभारी को। ज़ीरो FIR के नियम से किसी भी थाने में शिकायत दी जा सकती है।
साथ में क्या लगाएं
- 1930 कॉल या cybercrime.gov.in शिकायत की पावती संख्या
- बैंक स्टेटमेंट और पैसे कटने के SMS (UTR/ट्रांज़ैक्शन ID दिखे)
- ठग के नंबर, चैट, लिंक, कॉल लॉग के स्क्रीनशॉट
- अपना पहचान पत्र (आधार/वोटर ID) की कॉपी
कैसे और कहां जमा करें
- ठगी पता चलते ही 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर "Report Cyber Crime" से शिकायत करें; पावती नंबर लिख लें।
- अपने बैंक के कस्टमर केयर/शाखा में तुरंत सूचना दें, कार्ड/UPI/नेट बैंकिंग ब्लॉक कराएं और लिखित शिकायत की रसीद लें।
- यह पत्र प्रिंट करके सबूतों के साथ थाने/साइबर थाने में दें और रिसीविंग या FIR की कॉपी लें।
- पुलिस FIR दर्ज न करे तो ज़िले के पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक से शिकायत भेजें (BNSS धारा 173(4)); फिर भी न हो तो मजिस्ट्रेट के पास अर्ज़ी दी जा सकती है।
- फर्जी कॉल/SMS वाले नंबर की रिपोर्ट Sanchar Saathi के Chakshu पर भी करें।
ध्यान दें
- देर न करें: शिकायत जितनी जल्दी होगी, ठग के खाते में पैसा रुकने की संभावना उतनी ज़्यादा।
- पत्र में पूरा कार्ड नंबर, CVV, UPI PIN या OTP कभी न लिखें; खाते के आखिरी 4 अंक काफी हैं।
- "पैसा वापस दिलाने" का दावा करने वाले एजेंट/रिकवरी कॉल से बचें; यह दूसरी ठगी होती है।
- फोन से चैट, SMS और कॉल लॉग न मिटाएं; ये सबूत हैं।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
शिकायत पत्र: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
UPI फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें, फिर बैंक को सूचना देकर UPI/कार्ड ब्लॉक कराएं। उसके बाद थाने में लिखित शिकायत दें।
साइबर फ्रॉड में कौन सी धारा लगती है?
1 जुलाई 2024 से नए कानून लागू हैं: धोखाधड़ी के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318, किसी और बनकर ठगी के लिए धारा 319, और IT Act की धारा 66C (पहचान चोरी) व 66D (कंप्यूटर/फोन से रूप बदलकर ठगी)। सही धारा पुलिस तय करती है।
क्या किसी भी थाने में शिकायत कर सकते हैं?
हां। BNSS की धारा 173 के तहत ज़ीरो FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है, जिसे बाद में सही थाने भेजा जाता है।
ठगी का पैसा वापस मिलता है क्या?
जल्दी शिकायत होने पर ठग के खाते में पैसा रोका (freeze) जा सकता है और जांच/अदालत की प्रक्रिया से वापस मिल सकता है। गारंटी नहीं होती, इसलिए देर न करें।
पुलिस FIR न लिखे तो क्या करें?
ज़िले के SP को लिखित शिकायत डाक से भेजें। फिर भी कार्रवाई न हो तो मजिस्ट्रेट के पास BNSS के तहत अर्ज़ी दी जा सकती है।
दूसरे आवेदन पत्र
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