सरकारी अस्पताल शिकायत पत्र 2026: अधीक्षक/CMO को ऐसे लिखें
सीधा जवाब
सरकारी अस्पताल में डॉक्टर न मिलें, मुफ्त मिलने वाली दवा/जांच बाहर से मंगाई जाए, भर्ती या इलाज के लिए पैसे मांगे जाएं या स्टाफ बुरा व्यवहार करे, तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent) और ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO/सिविल सर्जन) को लिखित शिकायत करें। गर्भवती महिलाओं और बीमार नवजात को जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) में दवा, जांच, खाना, खून और आने-जाने की सुविधा मुफ्त है। आयुष्मान कार्ड के इलाज में दिक्कत हो तो 14555 पर भी शिकायत करें।
- किसे दें
- चिकित्सा अधीक्षक; ज़िले के CMO/सिविल सर्जन
- मुफ्त सुविधा (JSSK)
- गर्भवती व बीमार नवजात: दवा, जांच, खाना, खून, वाहन
- आयुष्मान कार्ड
- 14555 (PM-JAY शिकायत, टोल-फ्री)
- आगे
- राज्य स्वास्थ्य विभाग, CPGRAMS/राज्य शिकायत पोर्टल
अपना सरकारी अस्पताल शिकायत बनाएं
नीचे जानकारी भरें, पत्र अपने आप तैयार हो जाएगा। आपकी जानकारी सिर्फ आपके फोन/कंप्यूटर में रहती है, हमारे सर्वर पर नहीं जाती।
यह पत्र कब काम आता है
- OPD/इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं मिले या मरीज़ को लौटा दिया
- अस्पताल में मिलने वाली दवा या जांच बाहर से कराने को कहा
- भर्ती, ऑपरेशन या डिलीवरी के लिए पैसे मांगे गए
- गंदगी, बिस्तर/पानी/शौचालय की कमी
- स्टाफ ने बुरा व्यवहार किया
किसे लिखें: जिस अस्पताल की शिकायत है, उसके चिकित्सा अधीक्षक / मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को; ज़िला अस्पताल या PHC/CHC के लिए ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) / CMHO / सिविल सर्जन को (पद का नाम राज्य के हिसाब से अलग)। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए प्रिंसिपल/अधीक्षक को।
साथ में क्या लगाएं
- OPD पर्ची, भर्ती/डिस्चार्ज पेपर की कॉपी
- बाहर से खरीदी दवा या कराई जांच के बिल
- पैसे मांगने/देने का कोई सबूत, गवाहों के नाम
- आयुष्मान कार्ड की कॉपी (अगर उसी से इलाज होना था)
कैसे और कहां जमा करें
- अस्पताल में अधीक्षक के दफ्तर में पत्र दें और रिसीविंग लें; कई अस्पतालों में शिकायत पेटी/हेल्प डेस्क भी होती है।
- कॉपी ज़िले के CMO/सिविल सर्जन दफ्तर में दें या डाक से भेजें।
- आयुष्मान भारत (PM-JAY) कार्ड पर इलाज से मना किया गया या पैसे मांगे गए तो 14555 पर शिकायत करें।
- राज्य की स्वास्थ्य हेल्पलाइन (कई राज्यों में 104) या राज्य शिकायत पोर्टल पर भी दर्ज करा सकते हैं; हल न हो तो राज्य स्वास्थ्य विभाग के निदेशक/सचिव को लिखें।
ध्यान दें
- इमरजेंसी में पहले इलाज कराएं; शिकायत बाद में भी हो सकती है।
- पर्ची और बिल संभालकर रखें; बाहर से खरीदी दवा का बिल सबसे पक्का सबूत है।
- डॉक्टर/स्टाफ का नाम न पता हो तो समय, वार्ड और ड्यूटी का ब्योरा लिखें।
- इलाज में गंभीर लापरवाही (चिकित्सीय) का आरोप हो तो राज्य मेडिकल काउंसिल और ज़रूरत हो तो पुलिस/अदालत का रास्ता अलग है; पहले जानकार से सलाह लें।
यह एक नमूना है, कानूनी सलाह नहीं। जिस दफ्तर में पत्र देना है, उसका अपना फॉर्म या फॉर्मेट हो तो वही इस्तेमाल करें। SarkariSewa India एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।
शिकायत पत्र: और फॉर्मेट
Official links
ये सरकारी वेबसाइट/नंबर हैं। आवेदन और भुगतान सिर्फ इन्हीं पर करें। आखिरी जांच: 17 अक्टूबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सरकारी अस्पताल की शिकायत कहां करें?
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को और ज़िले के CMO/सिविल सर्जन को लिखित में। राज्य की स्वास्थ्य हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल पर भी कर सकते हैं।
सरकारी अस्पताल में दवा बाहर से लिखी जाए तो?
ज़्यादातर राज्यों में ज़रूरी दवाओं की सूची अस्पताल में मुफ्त मिलती है। बाहर से दवा लिखी जाए तो बिल संभालें और अधीक्षक/CMO को शिकायत करें।
डिलीवरी के लिए पैसे मांगे जाएं तो?
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK) में सरकारी अस्पताल में डिलीवरी, दवा, जांच, खाना, खून और आने-जाने का वाहन मुफ्त है। पैसे मांगने की शिकायत अधीक्षक/CMO को करें।
आयुष्मान कार्ड से इलाज से मना करें तो?
PM-JAY की टोल-फ्री हेल्पलाइन 14555 पर शिकायत करें; राज्य की आयुष्मान हेल्पलाइन/ज़िला शिकायत समिति भी है।
शिकायत पर कार्रवाई न हो तो?
राज्य स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को लिखें, राज्य शिकायत पोर्टल या CPGRAMS पर शिकायत करें, और RTI से अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई पूछें।
दूसरे आवेदन पत्र
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